दुर्गा पूजा में महिलाएं क्यों पहनती हैं लाल पार वाली साड़ी? बंगाल की संस्कृति से जुड़ा है इसका खास नाता
दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली महिलाएं लाल पार वाली साड़ी पहनती हैं, जो बंगाल की संस्कृति का अहम हिस्सा है।

बंगाली महिलाओं के लिए बहुत खास है लाल पार साड़ी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाल का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहले दुर्गा पूजा आता है। ये सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि बंगाल की संस्कृति का हिस्सा है। माना जाता है कि इस समय मां दुर्गा अपने मायके लौटती हैं और बंगाली मां का स्वागत बिल्कुल बेटी की तरह करते हैं।
चारों ओर भव्य पंडाल लगाए जाते हैं और मां दुर्गा की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान अष्टमी और दशमी के दिन बंगाली महिलाएं लाल पार वाली साड़ी पहनती हैं। ये साड़ी सफेद रगं की होती है और इस पर लाल बॉर्डर बना होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका बंगाल की संस्कृति में क्या महत्व है? आइे जानें क्यों इतनी खास है लाल पार वाली साड़ी।
क्यों खास है लाल पार वाली साड़ी?
इस साड़ी का बेस कलर सफेद या ऑफ-व्हाइट होता है, जिसके किनारे पर गहरे लाल रंग की चौड़ी पट्टी होती है। इसका आंचल लाल रंग का होता है, जिस पर खूबसूरत डिजाइन या पैटर्न बना होता है। इस साड़ी की बुनाई भी काफी खास होती है।
लाल पारी वाली साड़ी आमतौर पर गोरद या कोरियाल साड़ियां होती हैं। गोरद मलबेरी सिल्क से बनती है। इसका फैब्रिक हल्का, चमकदार और नेचुरल सिल्क से बना होता है। इस साड़ी को दुर्गा पूजा या दूसरे शुभ अवसरों के लिए खास माना जाता है।
कोरियाल साड़ी गोरद से थोड़ी ज्यादा सजी-धजी होती है। इसका सफेद सिल्क फैब्रिक काफी रिच होता है और इसके लाल बॉर्डर पर काफी बारीक जरी या रेशम का काम किया जाता है। इसके अलावा, दुर्गा पूजा के लिए लाल पार वाली तांत सूती साड़ियों का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है।
पहनने का खास तरीका
दुर्गा पूजा में महिलाएं लाल पार वाली साड़ी को खास अंदाज में पहनती हैं। इस स्टाइल को आठ पोर स्टाइल कहा जाता है। इसमें पल्लू को आगे की ओर लाकर दाहिने कंधे पर रखा जाता है और पल्लू के कोने में चाबी का गुच्छा या गांछ बांधा जाता है। ये विवाहित महिलाओं का प्रतीक माना जाता है।
लाल पार साड़ी का महत्व
बंगाली संस्कृति में इस साड़ी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सफेद साड़ी पर बना लाल रंग शक्ति और उमंग का प्रतीक है। लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए मां की विदाई के समय महिलाएं लाल पार वाली साड़ी पहनती हैं और सिंदूर खेला की रस्म करती हैं। ये सौभाग्य और नारी शक्ति का उत्सव माना जाता है।
