पूरन पोली

यह महाराष्ट्र में बनाई जाने वाली पारम्परिक स्वीट डिश है। पूरन पोली कई प्रकार की बनाई जाती हैं, लेकिन मुख्यत: चने की दाल की पूरन पोली ही अधिक प्रचलित है। एक खास तरह की मीठी रोटी जैसी खाने में ये बहुत ही लाजबाव होती है। पूरन पोली को आप 2-3 दिन तक रख कर खा सकते हैं। इसे बनाना भी बड़ा आसान है। इसे आप मैदे और आटे के मिश्रण से बने आटे की लोई में पिसी चने की दाल में बूरा शक्‍कर मिला कर बनाई पीठी भर कर बना सकते हैं।

खजूर के लड्डू

खजूर के लड्डू बहुत ही स्वादिष्ट और ताकत देने वाले होते हैं। ये भी गणेश चतुर्थी पर विशेष रूप से बनाये जाते हैं। खजूर में ग्लूकोज, पोटेशियम और बहुत सारे विटेमिन्स होते हैं जो काफी फायदेमंद होते हैं। साथ ही इन्हे बनाना भी बहुत ही आसान है। इसके लिए खजूर को धो कर सुखा लिया जाता है। फिर उसको छोटे छोटे टुकड़े में काट कर बीज निकाल देते हैं। अब मिक्‍सर में डाल कर इन टुकड़ों को दरदरा पीस कर भून कर लड्डू बनाये जाते हैं।

मलाई पूरी

मलाई पूरी जिसे मालपुआ भी कहते हैं एक पारम्परिक पकवान है। पारम्परिक रूप से कथा, यज्ञ, भंडारे व अन्य शुभ काम की समाप्ति के बाद हुये भोजन में असली घी के मालपुआ परोसे जाते हैं। मलाई पूरी अलग जगह पर अलग स्वाद और अलग तरीके से बनायी जाती हैं। इसे मैदा या आटे में चीनी डाल कर, पानी या दूध की सहायता से घोल बना कर बनाया जाता है, इस घोल में इलाइची पीस कर मिलाने से इसमें खुश्‍बू तो आती ही है स्‍वाद भी बढ़ जाता है।

केसरिया श्रीखंड

यह गुजरात और महाराष्ट्र राज्य का एक प्रख्यात मीठा है। इसका एक और नाम भी है 'मठो'. यह चक्का दही और चीनी से बनता है। साथ में कुछ कटे हुए मेवे भी डालते है। इसी दही में यदि केसर मिला दी जाये तो बनता है केसरिया श्रीखंड जो केवल स्‍वादिष्‍ट ही नहीं बल्कि स्‍वास्‍‍थ के लिए भी अच्‍छा होता है। दही में प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन और विटामिन बी अच्‍छी मात्रा में मौजूद होते हैं। इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है। साथ ही हड्डियों और जोडों के दर्द में राहत मिलती है।

खसखस का हलवा

खसखस का हलवा बहुत ताकतवर तथा स्वादिष्ट होता है। खसखस के हलवे को आप फ्रिज में 7 दिनों तक रख कर मजे से खा सकते हैं। पोस्‍ते के दाने को ही खसखस कहते हैं। बनाने के पहले खसखस को तीन चार घंटे भिगो कर पीसना होता है।