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    Ranchi yard रिमॉडलिंग का असर: टाटानगर-हटिया की चार ट्रेनें रद, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 09:03 PM (IST)

    दक्षिण पूर्व रेलवे ने रांची यार्ड के रिमॉडलिंग के चलते टाटानगर-हटिया रूट की कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जिससे यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इनमें टाटानगर-हटिया एक्सप्रेस और मेमू ट्रेनें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बंडामुंडा-बिसरा में रेलवे ब्रिज पर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे मजदूरों की जान खतरे में है, जहाँ सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है।

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    फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे ने रांची रेलवे यार्ड के रिमॉडलिंग कार्य को ध्यान में रखते हुए 10 दिसंबर 2024 से 07 जनवरी 2026 तक कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को रद करने की घोषणा की है। रेलवे के अनुसार, रिमॉडलिंग कार्य के चलते 10 दिसंबर से 07 जनवरी 2026 तक ट्रेन संख्या 18602/18601 टाटानगर–हटिया–टाटानगर एक्सप्रेस का परिचालन बंद रहेगा। 
     
    वहीं 23 दिसंबर से 07 जनवरी 2026 तक 68035/68036 टाटानगर–हटिया–टाटानगर मेमू रद रहेगी। ट्रेन रद होने से टाटानगर, रांची, चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। 
     
    लोकल यात्रियों का कहना है कि इन ट्रेनों पर निर्भरता अधिक होती है और छुट्टियों के समय इनका बंद रहना उनके दैनिक आवागमन से लेकर ऑफिस और स्कूल की दिनचर्या तक पर असर डालेगा। 
     
    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, रांची यार्ड का रिमॉडलिंग कार्य बड़े स्तर पर किया जा रहा है ताकि भविष्य में परिचालन अधिक सुरक्षित और सुचारू रूप से हो सके। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक ट्रेनें रद रहने से आवाजाही में परेशानी होगी। 
     

    रेलवे ब्रिज पर बिना सुरक्षा उपकरणों के पेंटिंग का काम, मजदूरों की जान पर आफत 

    बंडामुंडा-बिसरा मुख्य मार्ग स्थित संतोषपुर के पास हटिया जाने वाले रेलवे ब्रिज पर इन दिनों पेंटिंग का कार्य चल रहा है। लेकिन इस काम के दौरान सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन देखा जा रहा है। 
     
    लगभग 45 फीट की ऊंचाई पर आधा दर्जन से अधिक मजदूर बिना सेफ्टी बेल्ट, हार्नेस, हेल्मेट के खतरनाक तरीके से कार्य करते नजर आ रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों वाहन और आम लोग पुल के नीचे से गुजरते हैं। 
     
    कई राहगीरों ने बताया कि मजदूरों को बिना सुरक्षा केवल एक बाल्टी और ब्रश के सहारे काम कर रहे हैं। यदि कोई मजदूर फिसलकर नीचे गिर जाए, तो बड़ी दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। 

    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि न तो ठेका विभाग मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा रहा है और न ही कोई रेलवे अधिकारी स्थल पर आकर निगरानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि काम की गुणवत्ता से अधिक प्राथमिकता मजदूरों की सुरक्षा को दी जानी चाहिए।

    लोगों का कहना है कि यदि कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस संबंध में स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और रेलवे से मांग की है कि तुरंत सुरक्षा लापरवाही पर रोक लगाई जाए, मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

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