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    world AIDS Day : पश्चिमी सिंहभूम में 560 HIV मरीज, एआरटी सेंटर में मेडिकल अफसर-काउंसलर तक नहीं

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 09:31 PM (IST)

    पश्चिमी सिंहभूम जिले में एचआईवी संक्रमण बढ़ रहा है, जहाँ 560 मरीज हैं। एआरटी सेंटर में स्टाफ की कमी से मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है। अप्रैल 2025 से 74 नए मामले सामने आए हैं। मेडिकल अफसर और काउंसलर जैसे पदों के खाली होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। जागरूकता की कमी के कारण लोग समय पर जांच नहीं करा रहे, जिससे संक्रमण बढ़ रहा है। प्रशासन अब जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।

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    फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एचआईवी संक्रमण की स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। हाल ही में थैलेसीमिया से संक्रमित पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल अब और गहरा गए हैं। 
     
    जिले में फिलहाल 560 एचआईवी मरीज हैं। इनमें 347 पुरुष, 198 महिलाएं, 15 थर्ड जेंडर और 15 बच्चे शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि अप्रैल 2025 से अब तक 74 नए मरीज पंजीकृत हुए हैं, जो संक्रमण के तेजी से फैलने का संकेत है।


    स्टाफ की भारी कमी, एआरटी सेंटर गंभीर संकट में 

    जिले में एचआईवी मरीजों के इलाज और निगरानी के लिए संचालित एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी) सेंटर इस समय स्टाफ संकट से जूझ रहा है। सेंटर केवल चार कर्मचारियों के सहारे चल रहा है, जबकि प्रभावी संचालन के लिए सात पदों की आवश्यकता है। 

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    सबसे गंभीर स्थिति मेडिकल अफसर के पद को लेकर है, जो लंबे समय से रिक्त है। चार बार वैकेंसी निकाले जाने के बावजूद एक भी आवेदन नहीं आया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक प्रयास भी हल्के पड़ रहे हैं। 
     
    इसके अलावा काउंसलर और लैब टेक्नीशियन के पद भी खाली पड़े हैं। जिससे मरीजों की काउंसलिंग, नियमित जांच, वायरल लोड मॉनिटरिंग और एड्हीरेंस फॉलोअप पर सीधा असर पड़ रहा है। 

    इतने बड़े जिले में 560 मरीजों की निगरानी मात्र चार लोगों के सहारे करना अव्यवहारिक है। साथ ही, यह मरीजों की सुरक्षा और उपचार दोनों पर खतरा पैदा कर रहा है।

    बढ़ते केस और कमजोर व्यवस्था- जवाबदेही पर उठे सवाल 

    जिले में एचआईवी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन एआरटी सेंटर की स्थिति पहले से अधिक कमजोर हो चुकी है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर यह बड़ा सवाल है कि बिना मेडिकल अफसर और तकनीकी स्टाफ के एचआईवी प्रबंधन कैसे प्रभावी हो पाएगा?

    सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज बताती हैं कि एचआईवी मरीजों के लिए दवाएं और जांच किट पर्याप्त रूप से उपलब्ध हैं। परन्तु स्टाफ की कमी के कारण इन सेवाओं को सही समय पर और सही तरीके से मरीजों तक पहुंचाना कठिन हो रहा है।

    डॉ. मिंज ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में मरीजों को हर महीने फॉलोअप और परामर्श की जरूरत पड़ती है। लेकिन सीमित कर्मियों के कारण निगरानी प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, जो संक्रमण के नियंत्रण में एक बड़ी बाधा है।

    जिले में लोगों के बीच एचआईवी के प्रति जागरूकता की कमी भी चिंता का विषय है। कई लोग समय पर जांच नहीं कराते और उपचार में देरी कर देते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ता है।

    प्रशासन अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है, ताकि लोग समय पर जांच करा सकें और इलाज के प्रति जागरूक बनें। 

    560 एचआईवी मरीजों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि एआरटी सेंटर कब तक पूर्ण स्टाफ से सशक्त हो पाता है। बढ़ते मामलों के बीच मानव संसाधन की कमी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है।