पातकोम दिशोम माझी पारगना महाल के महासम्मेलन में एकता पर बल
संसू चाडिल सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड क्षेत्र में चल रहे पातकोम दिशोम माझी पा
संसू, चाडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड क्षेत्र में चल रहे पातकोम दिशोम माझी पारगाना महाल का तीन दिवसीय वार्षिक महासम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। पातकोम दिशोम पारगना रामेश्वर बेसरा की अध्यक्षता में आयोजित महासम्मेलन के अंतिम दिन पातकोम दिशोम के कई गांवों के माझी बाबा, माझी आयो, माझी आतु मोड़े होड़, पातकोम दिशोम, धाड़ दिशोम, सि†ा दिशोम, बारहा दिशोम, कुचुअ दिशोम के अलावा कई दिशोम से आये लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वक्ताओं ने समाज की एकजुटता पर बल दिया। इस दौरान अपने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, खान-पान, पोशाक व भाषा को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। वहीं ग्राम सभा, सीएनटी-एसपीटी एक्ट, पेशा कानून, पाचवी अनुसूची, संताल समाज की प्रगति के अलावा आदिवासियों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों पर भी गहराई से विचार-विमर्श किया गया। महासम्मेलन के समापन पर संताली समाज के महिला एवं पुरुषों ने पारंपरिक परिधान पहनकर मादर की थाप एवं नगाड़े की धुन पर सामूहिक नृत्य किया। मौके पर रामेश्वर बसेरा, साहित्यकार भोगला सोरेन, दुगनी पीड़ पारगाना दिवाकर सोरेन, आसेका शकर सोरेन, लुगू बुरू गोडेद सुरेन्द्र टुडू, दलु सिंह सरदार, श्यामल मार्डी, बबलू मुर्मु, शिलू सारना, सुधीर किस्कू, सुदामा हेब्रम, बुद्धेश्वर किस्कू, सुकराम मुंडा, देवेंद्र बेसरा, सोमाय टुडू, अरुण सोरेन, सुमित्रा सोरेन, सरस्वती बास्के आदि मौजूद थे।
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