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झारखंड में SIR के दौरान फर्जीवाड़ा: साहिबगंज में हिंदू महिला को बना दिया मुस्लिम, पिता के नाम में भी हेरफेर

Published: Sat, 31 Oct 2026 01:42 PM (IST)

Vote Chori In Jharkhand: झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां साहिबगंज के ...और पढ़ें

साहिबगंज में SIR के दाैरान पकड़ी गई जालसाजी। (एआइ फोटो)

साहिबगंज में SIR के दाैरान पकड़ी गई जालसाजी। (एआइ फोटो)

HighLights

  1. हिंदू महिला मिता देवी की पहचान फातिमा बीबी बनी।

  2. मतदाता सूची में फर्जी पिता, वंशावली बनाकर नाम दर्ज।

  3. गुमनाम पत्र से फर्जीवाड़े का खुलासा, उच्च स्तरीय जांच की मांग।

डा. प्रणेश, जागरण, साहिबगंज। झारखंड में चुनाव आयोग के एसआइआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर की गई जालसाजी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में फर्जीवाड़े की हद तब उजागर हुई, जब मिता देवी नाम की एक हिंदू महिला का नाम बदलकर फातिमा बीबी दर्ज किया गया। नियम-कानून को ताक पर रखकर नेजामुद्दीन मोमिन उसका पिता बन बैठा।

हद तो यह कि पहचान बदलने के लिए दस्तावेजी हेरफेर कर वंशावली भी बना दी गई। मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र बरहेट (साहिबगंज) का यह मामला, जहां हिंदू महिला को पहचान बदलकर मुस्लिम बना दिया गया।

निश्चित ही सरकारी तंत्र की आंखों में धूल झोंकने और फर्जीवाड़े की पराकाष्ठा का एक बड़ा प्रमाण है। यह पूरा मामला आधार कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज में जालसाजी, मतांतरण, घुसपैठ और पहचान की चोरी का एक ज्वलंत उदाहरण है।

इससे पहले बरहड़वा में अगस्त में एसआइआर सुनवाई के क्रम में सात लोगों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। तब राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के निर्देश पर आठ लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज करायी गई।

बहरहाल, आयोग के इस विशेष अभियान ने पहचान और नागरिक दस्तावेजों से खिलवाड़ करने वाले इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया है।

एसआइआर के उद्देश्य को मिला बल

जानकारी के अनुसार, बरहेट प्रखंड के बरमसिया की मिता देवी ने गांव के ही नजरूल अंसारी से दूसरी शादी कर ली और नाम बदलकर फातिमा बीबी कर लिया। अपने पूर्व के आधार (3803 6561 9507) में उसने अपने नाम में संशोधन करा लिया।

यहां तक सब कुछ ठीक था। किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई। उसका नाम मतदाता सूची में था और वह चुनावों में लगातार वोट भी दे रही थी, लेकिन अबकी पुनरीक्षण में मामला फंस गया।

एसआइआर के दौरान गांव के ही नेजामुद्दीन मोमिन से उसकी मैपिंग भी कर दी गयी। हालांकि, नेजामुद्दीन की छह संतानों का नाम सामने आने पर बरहेट के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी बिजय कुमार ने 26 सितंबर को नोटिस देकर पक्ष रखने को कहा।

इसके बाद निजामुद्दीन मोमिन ने एक वंशावली बनवायी जिसमें फातिमा बीबी को अपनी छह संतानों में दूसरे नंबर पर बताया। ग्राम प्रधान सुशील टुडू, राजस्व उपनिरीक्षक, सीआइ व सीओ ने भी इस वंशावली को सत्यापित कर दिया। ऐसे में उसका नाम मतदाता सूची में भी शामिल हो गया।

गुमनाम पत्र से खुली पोल

हाल ही में एक व्यक्ति ने उपायुक्त दीपक कुमार दूबे और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार को एक गुमनाम पत्र भेजा। इसमें कहा गया कि यह मामला सीधे तौर पर देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिकी परिवर्तन के प्रयास और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा हुआ है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे सिंडिकेट की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। फर्जी वंशावली, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन हो। मुख्य आरोपित सलामत अंसारी, ग्राम प्रधान सुशील टुडू और संलिप्त सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता द्वारा इस पत्र के साथ सात पुख्ता दस्तावेज संलग्न किए गए हैं, जिनमें एसआइआर का भरा हुआ फार्म, मिता देवी व फातिमा बीबी के आधार कार्ड, समान आधार नंबर, पैन कार्ड और अधिकारियों के हस्ताक्षर युक्त नेजामुद्दीन मोमिन की फर्जी वंशावली शामिल हैं, जो इस पूरे खेल की पोल खोलते हैं।

क्या है पूरा मामला, कैसे रची गई साजिश?

शिकायत पत्र में सीधे तौर पर सलामत अंसारी और ग्राम प्रधान सुशील टुडू पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि ग्राम बरमसिया की निवासी हिंदू महिला मिता देवी (पिता जालश रंजन दत्ता) पति का नाम प्रीतम कुमार चंद्र को सोची-समझी साजिश के तहत फातिमा बीबी (पति नज़रुल अंसारी) के रूप में पेश किया गया।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि महिला के पुराने (मिता देवी) और नए (फातिमा बीबी) दोनों ही पहचान पत्रों (आधार कार्ड) पर आधार संख्या बिल्कुल एक ही (समान) है।

महिला के पुराने पैन कार्ड का नंबर FRMPD5039L है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी मूल पहचान को पूरी तरह छिपाकर दस्तावेजों में जालसाजी की गई है।

गोड्डा जिले की रहनेवाली है मिता देवी

मिता देवी उर्फ फातिमा बीबी मूलत: गोड्डा जिले की रहनेवाली है। जालस रंजन दत्ता ने अपनी पुत्री मिता देवी की शादी 2012 में बरहेट प्रखंड के बरमसिया निवासी प्रीतम कुमार चंद्र से की थी।

बताया जाता है कि प्रीतम कुमार चंद्र बाहर रहकर मेहनत-मजदूरी करता है। ऐसे में मिता देवी का संपर्क नजरूल अंसारी से हुआ और करीब आठ साल पूर्व दोनों ने शादी कर ली। बताया जाता है कि मिता देवी के पूर्व पति से तीन बच्चे हैं जो उनके पूर्व पति के पास हैं।

इधर, मिता देवी जब फातिमा बीबी बनी तब पुन: उसके दो बच्चे हुए। इस पूरे प्रकरण में नेजामुद्दीन अंसारी व उसके पुत्र सलामत अंसारी की बड़ी भूमिका सामने आ रही है।

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बरहेट में गलत तरीके से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की शिकायत मिली है। एक महिला के दो आधार कार्ड भी मिले हैं, जिसमें नंबर समान हैं। मिता देवी के फातिमा बीबी बनने के पूरे प्रकरण की गहन जांच का निर्देश दिया गया है।

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के रवि कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड

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