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    नामांकन 283 बच्चों का पर स्कूल में आए 19 वो भी बिना किताब और पोशाक, मिड डे मील में अंडा वाले दिन लगती है भीड़

    साहिबगंज के बरहड़वा में स्कूलों की हालत खराब है। भवानंदपुर के एक स्कूल में जर्जर भवन में मिड डे मील बन रहा था। बच्चों की उपस्थिति भी कम थी और कई बच्चे बिना पोशाक और किताबों के स्कूल आए थे। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि अभिभावकों को जागरूक करने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा।

    By Pranesh Kumar Edited By: Nishant Bharti Updated: Thu, 21 Aug 2025 01:38 PM (IST)
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    पोशाक न पुस्तक फिर भी पढ़ रहे उमवि भवानंदपुर के बच्चे

    संवाद सहयोगी, बरहड़वा (साहिबगंज)। प्रखंड क्षेत्र के स्कूलों का हाल बेहाल है। कुछ जर्जर स्कूलों में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तो कुछ विद्यालय में मिड डे मील में भारी गड़बड़ी की जा रही है।

    मंगलवार को बंगाल की सीमा से सटे उत्क्रमित मध्य विद्यालय भवानंदपुर में सुबह करीब 11:50 बजे रसोइया स्कूल के जर्जर भवन के बरामदे में मिड डे मील तैयार कर रही थी। दो कमरों का भवन काफी जर्जर हो चुका है। हालांकि, उसमें पठन-पाठन नहीं होता है।

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    यहां कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। 283 बच्चे नामांकित हैं पर नए भवन के एक कमरे में मात्र 19 बच्चे बैठे थे। उस समय तक हाजिरी बही में बच्चों की उपस्थिति नहीं बनाई गई थी।

    इस स्कूल में तीन शिक्षक हैं जिनमें एक छुट्टी में थे और दो उपस्थित थे। पूछने पर शिक्षकों ने बताया कि मिड डे मील के बाद उपस्थिति बनती है। बताया कि राधानगर क्षेत्र में जलजमाव होने और बच्चों के अभिभावकों द्वारा पटवन का कार्य करने के कारण कम संख्या में बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।

    वहीं, विद्यालय प्रबंधन समिति के ध्रुव मंडल बताते हैं कि बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति हो, इसके लिए अभिभावकों को जागरूक भी किया जाता है लेकिन कोई खास प्रभाव नही पड़ता है।

    बिना किताब व पोशाक के स्कूल पहुंचे बच्चे

    बच्चे स्कूल ड्रेस में पहुंचे इसके लिए विभाग उन्हें राशि उपलब्ध कराता है। बच्चों को पढ़ाई लिखाई में कठिनाई न हो इसके लिए बैग व किताब-कापी मिलती है किंतु मंगलवार का स्कूल के कक्षा में ऐसा नजारा देखने को मिला जैसे बच्चे स्कूल नहीं खेल के मैदान में या घर में हों।

    करीब 19 बच्चे ही कक्षा में बैठे थे वो भी बिना ड्रेस व किताबों के। शिक्षक संजय प्रसाद भगत रजिस्टर में कोई रिपोर्ट तैयार कर रहे थे। बीच-बीच में जाकर बच्चों को डांट रहे थे।

    एसएमसी अध्यक्ष ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में ड्रेस की राशि मिली थी लेकिन इस बार अब तक नहीं मिली है। जूते मोजे की भी राशि नहीं मिली है। मिड डे मील की राशि इस वर्ष के फरवरी माह के बाद से अब तक नहीं मिली है। बच्चों के लिए पीने के पानी की भी परेशानी है। स्कूल की पानी टंकी से सिर्फ खाना ही बनाया जा रहा है।

    प्रधानाध्यापक थामस सोरेन ने बताया कि कभी कभार बच्चों की उपस्थिति कम रहती है। स्कूल में जिस दिन मिड डे मील में अंडा दिया जाता है उस दिन उपस्थिति बढ़ जाती है।

    पोशाक के लिए अब तक राशि क्यों नहीं भेजी गई है इसकी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का निर्देश भी दिया जाएगा।