लोहरदगा, जासं। लोहरदगा हिंसा में कथित तौर पर घायल होने के बाद रांची के रिम्स में इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में नीरज के परिजनों ने बड़ा बयान दिया है। नीरज के परिजनों का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने उन पर मौत की  वजह बदलने को लेकर दबाव बनाया है। नीरज की पत्नी दिव्या कुमारी का कहना है कि प्रशासन पूरी तरह से इस मामले को उलटना चाहता है। उनके घर वालों को तो यह भी पता नहीं था कि नीरज की मौत हो चुकी है। वह खुद नीरज के साथ अस्पताल में अकेली थी।

इधर दिव्या के बयान को पुलिस ने सिरे से खारिज किया है। रांची जोन के आइजी नवीन कुमार सिंह के अनुसार पुलिस प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने नीरज के परिवार पर कोई भी दबाव नहीं बनाया है। नीरज के मामा ने जो बयान दिया है उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस इस मामले में अनुसंधान कर रही है। दिव्या ने कहा कि प्रशासन को जब नीरज की मौत की जानकारी मिली, प्रशासन के अधिकारियों ने उनके घर को घेर लिया।

घर के सदस्यों को दबाव दिया गया कि वे कहें कि नीरज की मौत बाथरूम में गिरने और चोट लगने से हुई है। जबकि सच्चाई यह है कि नीरज नागरिकता संशोधन विधेयक के समर्थन में निकाले गए जुलूस में शामिल होने के लिए गए हुए थे। वहां से जब वे वापस लौटे तो उन्होंने बताया कि उनके सिर में किसी ने मार दिया है। इससे सिर में बहुत दर्द हो रहा है। इतना कहते-कहते नीरज कुछ भी कहने में असमर्थ हो गए।

उन्होंने हड़बड़ाहट में आसपास के लोगों से संपर्क किया कि कोई उन्हें अस्पताल ले जाए, परंतु कर्फ्यू में नीरज को अस्पताल पहुंचाने में कोई भी मदद को आगे नहीं आया। बड़ी मुश्किल से वह खुद नीरज को लेकर अस्पताल पहुंची थी, जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया था। उन्होंने बेहतर इलाज के लिए सबसे पहले उन्हें रांची स्थित ऑर्किड अस्पताल पहुंची। इसके बाद फिर रिम्स गई, जहां उनकी मौत हो गई। 

किसी भी बड़े अधिकारी ने नहीं ली पीडि़त परिवार की सुध : मुरारी

इधर नीरज के बहनोई मुरारी प्रजापति का कहना है कि प्रशासन ने उनके परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। अब तक सोशल मीडिया के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता को भी स्पष्ट करते हुए मुरारी ने कहा है कि बहुत मुश्किल से 30-40 लोग मदद के लिए आगे आए हैं। कुल मिलाकर अब तक 20-22 हजार रुपये की मदद मिल पाई है।

सरकार को चाहिए कि कम से कम नीरज की पत्नी को सरकारी नौकरी दे। बच्चों की शिक्षा का भी इंतजाम करे। उन्होंने कहा कि न तो राजनीतिक दल और न ही किसी बड़े अधिकारी ने नीरज के परिवार से मिलकर उनकी समस्या जानने की कोशिश की है।

Posted By: Alok Shahi

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