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    UPSC Result 2022: पिता दुकान में करते थे काम... मेहनत के बूते बेटा UPSC में कामयाब... पढ़िए, कुमार सौरभ की कहानी

    By M EkhlaqueEdited By:
    Updated: Mon, 30 May 2022 04:35 PM (IST)

    Success Story Of IAS Kumar Saurabh संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में झारखंड के पलामू जिले के कुमार सौरभ ने सफलता हासिल की है। पिता की मौत के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अभाव में रहकर सौरभ ने मेहनत के बूते सफलता का परचम लहराया है।

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    UPSC Result 2022: पिता दुकान में करते थे काम... मेहनत के बूते बेटा बना IAS... पढ़िए, कुमार सौरभ की कहानी

    प्रवीण शुक्ला, पांडू ( पलामू )। Success Story Of IAS Kumar Saurabh कुमार सौरव की कहानी अभाव में रहने वालों के लिए प्रेरणादायक है। पिता दिलीप पांडेय दिल्ली के एक दुकान में काम करते थे। साल 2011 में पिता की मौत के बाद कुमार सौरव अपनी मां किरण देवी और बड़ी बहन साक्षी पांडेय के साथ दिल्ली से अपने गांव पलामू जिले के पांडू प्रखंड के पांडू लौट गए। इसके बाद हिम्मत नहीं हारी। गांव में रहकर पढ़ाई जारी रखी। बहन का साथ मिला तो मैट्रिक और इंटर के बाद स्नातक की पढ़ाई के लिए फिर दिल्ली का रूख किया। स्नातक करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की। और पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहरा दिया।

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    भारतीय राजस्व सेवा के बनेंगे अधिकारी

    संघ लोक सेवा आयोग-2021 की परीक्षा का परिणाम सोमवार को जारी हुआ। इसमें पलामू जिले के पांडू गांव के 24 वर्षीय कुमार सौरव ने 357 वां स्थान हासिल किया है। अब कुमार सौरव भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी बनेंगे। उन्होंने यह मुकाम अपने पहले की प्रयास में हासिल किया है। हालांकि इससे सौरव संतुष्ट नहीं हैं। उनका सपना आइएएस अधिकारी बनने का है। इसके लिए तैयारी जारी रखेंगे।

    राजनीति विज्ञान के छात्र

    13 जुलाई, 1999 को जन्मे कुमार सौरव की स्कूली पढ़ाई झारखंड के पलामू के गांव में ही हुई है। 2015 में रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफयर इंस्टीच्यूट विश्रामपुर से मैट्रिक की पढ़ाई की। इसके बाद गांव में रहकर कल्याण उच्च विद्यालय से 2017 में इंटर की परीक्षा पास की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कालेज में स्नातक की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया। 2020 में राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। सपना पूरा करने के लिए दिल्ली में रहकर यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू की। वाजीराव इंस्टीच्यूट में कोचिंग ली। इसके साथ ही सेल्फ स्टडी की।

    सफलता में बहन का हाथ

    कुमार सौरव की सफलता के पीछे बहन का हाथ रहा है। बड़ी बहन गांव में बच्चों को कोचिंग क्लास कराती है। इससे जो रुपये जमा होते वह पढ़ाई के लिए भाई के पास भेजती। भाई ने भी बहन की उम्मीद को खाली नहीं जाने दिया। सोमवार को जब यूपीएससी परीक्षा का परिणाम आया तो सौरव गांव में ही थे। उन्होंने मां और बहन के साथ सफलता की खुशियों को लुटाया। पिता की मौत के एक दशक बाद घर में खुश होने को मौका जो था। सौरव को मिठाई खिलाते हुए मां और बहन की आखों में खुशियों के आंसू आ गए।

    अभाव और विपरीत परिस्थिति कोई मायने नहीं रखता

    कुमार सौरव ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि मैं अपनी सफलता का श्रेय बहन साक्षी को देना चाहूता हूं। उसने आर्थिक और नैतिक दोनों रूप से सपोर्ट किया। मां का भी साथ मिला लेकिन बहन ने कोचिंग से पैसे जमा कर आर्थिक सपोर्ट किया वह महत्वपूर्ण है। उसके बगैर दिल्ली में रहकर तैयारी संभव नहीं थी। मेरा सपना आइएएस अधिकारी बनने का है। इस बार भी परीक्षा देने जा रहा हूं। 5 जून को प्रारंभिक परीक्षा है। मेरा मानना है कि अगर आदमी तय कर ले कि उसे सफल होना है तो अभाव और विपरीत परिस्थिति कोई मायने नहीं रखता है।

    कुमार सौरभ से जुड़ी खास बातें

    • जन्म तिथि- 13 जुलाई, 1999
    • 2011 में पिता दिलीप पांडेय का निधन
    • 2015 में मैट्रिक
    • 2017 में इंटर
    • 2020 में राजनीति विज्ञान से बीए
    • ट्यूशन पढ़ाकर बड़ी बहन साक्षी पांडेय ने उठाया पढाई का खर्च