जल-जंगल-जमीन पर टिका आदिवासी अस्मिता:गिरीश कुबेर
अखिल भारतीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने कहा कि जल-जंगल जमीन पर आदिवासी अस्मिता टिका है।
जागरण संवाददाता, रांची : अखिल भारतीय जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने कहा कि आदिवासियों की अस्मिता जल-जंगल-जमीन पर टिकी है। इससे छेड़छाड़ हुआ तो जनजाति समाज का अस्तित्व नष्ट हो जाएगा। इसे बचाने के लिए समाज के युवाओं को सामने आना होगा। वे सोमवार को जमशेदपुर में वनवासी कल्याण केंद्र के प्रांतीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। बालासाहब देशपाडे ने 1952 में काफी विषम परिस्थितियों के बीच जमशेदपुर में कल्याण आश्रम की स्थापना की। उस समय जनजाति समाज अपनी अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। बालासाहब ने अस्मिता की रक्षा हेतु जगह-जगह बजरंगबली की मुर्ति स्थापित कराई। नियोगी कमीशन के माध्यम से चर्च की काली
करतूतों को उजगार कराया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के संगठन मंत्री एवं आयाम प्रमुख के 288 कार्यकर्ता शामिल हुए। मौके पर प्रात उपाध्यक्ष डॉ सुखी उरांव, प्रांत महामंत्री रिझू कच्छप, निरंजन गौतम, स्टेफन हेम्ब्रम, बृजलाल अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
गांवों को बनाया जाएगा स्वावलंबी
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में जिले से आये संगठन मंत्रियों ने जिले में चल रहे कायरें का वृत निवेदन प्रस्तुत किया। ग्रामीण स्वावलंबन के आयाम के विषय में चर्चा करते हुए बिंदेश्वर साहु ने कहा कि आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से गाव को अपने पैर पर खड़ा होना होगा। सम्मेलन के द्वितीय दिन जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हासदा ने जनजाति समाज की सुरक्षा, स्वाभिमान, अस्मिता को बरकार रखने पर बल दिया। सम्मेलन को डॉ एचपी नारायण, हीरेंद्र सिन्हा, प्रणय दत्त, कैलाश उरांव, संदीप उराव, मेघा उराव, सोमा उराव ने भी संबोधित किया। आयोजन की व्यवस्था रामनाथ सिंह, विजय मिश्रा, निरंजन गौतम, बृजलाल अग्रवाल, हरेराम दूबे, रितेष शुक्ला, विकास सिंघानिया, दयाशकर सिंह, तुलसी गुप्ता आदि संभाल रहे थे।
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