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    निलंबित विधायक विकास मुंडा बोले-गद्दार पार्टी है आजसू, भाजपा का थामेंगे दामन !

    By Alok ShahiEdited By:
    Updated: Tue, 11 Dec 2018 07:07 PM (IST)

    Vikas Munda. कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाते हुए आजसू ने विकास मुंडा को सस्‍पेंड कर दिया है।

    निलंबित विधायक विकास मुंडा बोले-गद्दार पार्टी है आजसू, भाजपा का थामेंगे दामन !

    रांची, राज्य ब्‍यूरो। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में एक दिन पूर्व आजसू की सदस्यता से एक साल के लिए निलंबित किए गए तमाड़ के विधायक विकास कुमार मुंडा मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो पर जमकर बरसे। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने जहां सुदेश के विरुद्ध कई आरोप लगाए, वहीं अपने निलंबन तथा निलंबन की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। यह भी कहा कि उनका गुनाह इतना ही था कि उन्होंने झारखंडी हितों खासकर स्थानीय नीति, सीएनटी एक्ट में संशोधन के विरोध तथा पारा शिक्षकों के समर्थन में आवाज उठाई।

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    विकास ने सुदेश पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा 'वे स्वयं भी सरकार के विरोध में बोलते रहे हैं। जब मैंने सरकार के विरोध में बोलना शुरू किया तो उन्हें नागवार गुजरा'। कहा, सरकार में रहकर सरकार की नीतियों का विरोध करना दोहरी नीति ही तो है। सरकार के अंदर कुछ और बाहर कुछ, यह एक तरह से झारखंड के लोगों के साथ गद्दारी है।

    उन्होंने कहा कि शुरू में सुदेश ने कहा कि पूर्ण बहुमत के लिए भाजपा के साथ गठबंधन कर रहे हैं। लेकिन चार सालों में इस सरकार की कई झारखंड विरोधी फैसले रहे। चार साल के कार्यकाल में न तो कोई हित पार्टी साध पाई न ही झारखंड का हित ही सध पाया। मेरे अलावा कई विधायकों-कार्यकर्ताओं ने कार्यसमिति की बैठकों में सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग उठाई। लेकिन पार्टी ने कोई फैसला नहीं लिया।

    उन्हें उम्मीद थी कि नौ दिसंबर को कार्यसमिति की बैठक में पार्टी इसपर निर्णय लेगी। लेकिन हुआ उल्टा। सरकार को दो माह का अल्टीमेटम देकर छोड़ दिया गया। इससे साफ हो गया कि पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि आजसू में वन मैन शो चलता है। वहां एक व्यक्ति की राय मायने रखती है, सभी की नहीं। न खाता न बही, सुदेश कहें वही सही।

    उन्होंने अपने सवालों पर पार्टी से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की भी मांग की। उनके अनुसार, उन्होंने विधायक राजकिशोर महतो को भी पत्र भेजकर सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग की थी। यह भी कहा कि पार्टी में एकतरफा निर्णय लेने की प्रवृत्ति के कारण ही नवीन जायसवाल, योगेंद्र महतो, दशरथ गगराई आदि ने पार्टी छोड़ दी थी।

    भाजपा या झामुमो में हो सकते हैं शामिल : विकास मुंडा के झामुमो में शामिल होने की चर्चा है। भाजपा के लोग भी उनके संपर्क में हैं। किसी दल में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी किसी भी दल में शामिल होने की बात नहीं है। वे अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से मशविरा कर ही कोई निर्णय लेंगे। हेमंत की नीतियों के सवाल पर उन्होंने इतना ही कहा कि नेता प्रतिपक्ष के काम को बेहतर ढंग से कर रहे हैं।

    चंद्रप्रकाश को क्यों नहीं हटाया? : विकास मुंडा ने यह भी सवाल उठाया कि यूपीए की सरकार में जब चंद्रप्रकाश चौधरी पार्टी लाइन के विरुद्ध सरकार में शामिल होकर मंत्री बन बैठे तो उनके विरुद्ध सुदेश ने निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की? कहा, यह साबित करता है कि पार्टी से बड़ा उनका परिवार है। चंद्रप्रकाश उनके परिवार के सदस्य थे, इसलिए कार्रवाई नहीं की। इस सरकार में भी चंद्रप्रकाश ने कैबिनेट की बैठकों में झारखंडी हितों के विरोधी फैसलों में कोई आपत्ति नहीं की। सीएनटी एक्ट में संशोधन के मामले में तो मीडिया के सामने जाने से बचते रहे। परिवार की बात हो तो सब ठीक, बाहरी सवाल उठाता है तो पार्टी विरोधी गतिविधि हो गई? 

    पहली बार प्रेस विज्ञप्ति से निलंबन : विकास ने निलंबन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि बिना कोई स्पष्टीकरण पूछे निलंबन का एकतरफा निर्णय ले लिया गया। रात ग्यारह बजे एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनके निलंबन का आदेश कर दिया गया।

    ढोंग है बिरसा की प्रतिमा का निर्माण : आजसू द्वारा तमाड़ में भगवान बिरसा मुंडा की बन रही 150 फीट ऊंची प्रतिमा के लिए जमीन देनेवाले रामदुर्लभ मुंडा ने आरोप लगाया कि विकास मुंडा नहीं चाहते हैं कि यह प्रतिमा बने। उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों की जड़ में यही था। उन्हें डर था कि उनके द्वारा जमीन देने से उनका (रामदुर्लभ मुंडा) कद बढ़ जाएगा और उनकी विधायकी खतरे में पड़ जाएगी। इस आरोप के सवाल पर विकास ने सफाई दी कि वे प्रतिमा निर्माण के विरोध में नहीं हैं। लेकिन प्रतिमा निर्माण के नाम पर ढोंग और नौटंकी से खिलाफ हैं। सिर्फ नाम बेचने से काम नहीं चलेगा। सुदेश जी को भगवान बिरसा के आदर्शों को भी जानना-पढऩा होगा।