रांची, जासं। दैनिक जागरण के ब्रांड झारखंड पेज पर सोमवार को लाइव प्रसारण में बच्चों के बीच योग गुरु मंगेश त्रिवेदी के निर्देशन में योग शिक्षिका वर्षा गौतम ने बच्चों को योग सिखाया। इस योग क्रिया का दैनिक जागरण ब्रांड झारखंड पेज पर लाइव किया गया। यहां योग की महत्वपूर्ण जानकारी और लाभ के बारे में बताया गया। परफेक्ट पर्सनालिटी पाने के लिए लंबी हाइट होना बहुत जरूरी है। जिन बच्चों की हाइट कम होती है, वे लोग अपनी पर्सनालिटी में कुछ कमी महसूस करते हैं।

लंबाई कम होने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रोल आनुवांशिक गुण अदा करते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपकी हाइट बढ़ जाए तो इसमें योग क्रिया ताड़ासन आपकी निश्चित रूप से सहायता कर सकता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत करके शरीर को नई मजबूती और ऊर्जा प्रदान करती है।

योग गुरु मंगेश त्रिवेदी ने बताया कि प्रोटिन युक्त भोजन करने से व नियमित रूप से दस मिनट ताड़ासन करने से हाइट बढ़ती है। लेकिन यह आसन 26 वर्ष की उम्र तक ही हाइट बढ़ाने में मददगार है। ताड़ासन की खासियत यह है कि बच्चों की लंबाई निश्चित रूप से बढ़ती है

ताड़ासन की विधि

1. सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। आपने दोनों पैर को आपस में मिलाकर और दोनों हथेलियों को अपने बगल में रखें।

2. फिर पूरे शरीर को स्थिर रखें और दोनों पैरों पर अपने शरीर का वजन सामान रखें। उसके बाद दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं।

3. हथेलियां सीधी रखें, फिर सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए। इससे आपके कंधों और छाती में भी खिंचाव आएगा।

4. इसके साथ ही पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखिए। इस स्थिति में कुछ देर रहें।

5. कुछ देर रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को वापस सिर के ऊपर ले आएं। इस आसन को प्रतिदिन 10-12 बार कर सकते हैं।

सावधानी

ताड़ासन करते समय शरीर बिलकुल सीधा होना चाहिए। सिर, गर्दन और मेरूदंड एक समान स्थिति में लंबवत होना चाहिए। कमर के नीचे का हिस्सा जमीन की ओर दृढ़ता के साथ लगा होना चाहिए। कमर से ऊपर का भाग सामान्य और सहज होना चाहिए। ताड़ासन का अभ्यास आराम से धीरे-धीरे करना चाहिए। ताड़ासन के दौरान गहरी सांस लेते रहना चाहिए।

लाभ

ताड़ासन के अभ्यास से शरीर सुडौल रहता है। इस योग से शरीर में संतुलन और दृढ़ता आती है। रीढ़ की हड्डी में भी खिंचाव आता है। इससे लंबाई बढ़ती है और स्लिप डिस्क की संभावना नहीं कम रहती है। कंधों के जोड़ मजबूत होते हैं और गहरी सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया में सुधार आता है।

Edited By: Sujeet Kumar Suman