रांची, [संजय कुमार]। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस अपना 96वां स्थापना दिवस शुक्रवार यानी विजयादशमी के दिन मनाएगा। हिंदी तिथि के अनुसार इसी दिन 1925 ई. में नागपुर के मोहितेवाड़ा नामक स्थान पर संघ की स्थापना डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। वैसे तो नवरात्र प्रारंभ होने के दिन से ही संघ के स्वयंसेवक स्थापना दिवस समारोह को शाखाओं पर मनाने लगते हैं, लेकिन विजयादशमी के दिन नागपुर में आयोजित समारोह में सरसंघचालक उपस्थित रहते हैं और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हैं।

समारोह में स्वयंसेवक अस्त्र-शस्त्र पूजन करने के साथ ही पथसंचलन निकालते हैं। शुक्रवार को नागपुर में स्थापना दिवस समारोह का कार्यक्रम सुबह 7.30 में प्रारंभ हो जाएगा। अस्त्र-शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इसका सीधा प्रसारण आरएसएस के फेसबुक, ट्वीटर और यूट्यूब के साथ-साथ कई टीवी चैनलों पर किया जाएगा।

इस बार कार्यक्रम रेशीमबाग स्थित संघ कार्यालय के मैदान में होगा, परंतु पिछले वर्ष की तरह पथसंचलन नहीं निकाला जाएगा। संघ प्रमुख अपने संबोधन में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में किए गए सेवा कार्य, संभावित तीसरी लहर की तैयारी, स्वदेशी भाव, देश की बढ़ती जनसंख्या, विश्व में बढ़ रहे आतंक, देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष आदि विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं।

एचईसी धुर्वा में शस्त्र पूजन करते क्षेत्र प्रचारक रामनवमी प्रसाद।

रांची महानगर के केशव नगर में निकला पथसंचलन

रांची महानगर के केशव नगर, धुर्वा में गुरुवार को संघ का स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। दोपहर दो बजे से आयोजित इस कार्यक्रम में सबसे पहले पथसंचलन निकाला गया। उसके बाद उत्तर पूर्व के क्षेत्र प्रचारक रामनवमी प्रसाद ने भारत माता के साथ-साथ अस्त्र शस्त्र पूजन किया। उसके बाद स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

हिंदू समाज की विकृतियों को दूर करने के लिए करना होगा काम

विजयादशमी उत्सव के अवसर पर रांची में केशव नगर धुर्वा के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक रामनवमी प्रसाद ने कहा कि कभी स्थिति ऐसी थी कि संघ के स्वयंसेवकों को लोग तिरस्कार भरी नजरों से देखते थे। आज वही समाज आशा भरी नजरों से देख रहा है। संघ से समाज की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। हम सभी को मिलकर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए प्रयास करना है।

इसके लिए हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए मिलकर प्रयास करना होगा। हिंदू समाज को शक्तिशाली, बलशाली बनाना होगा। हिंदू समाज को संगठित किए बिना भारत को परम वैभव की ओर नहीं ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदू समाज की स्थिति को देखने के बाद ही आरएसएस की वर्ष 1925 में नागपुर में स्थापना की। उस समय लोग उन पर हंसते थे, परन्तु आज परिस्थिति अलग है।

आज भारत के साथ-साथ विश्व में जिन देशों में हिंदू रहते हैं, उनमें से अधिकतर देशों में संघ की शाखा लग रही है। परिस्थितियां बदल रही है। जरूरत है काम को और विस्तार देने की। संघ के 100 वर्ष पूरे होने तक देश के सभी गांवों तक अपना काम पहुंचे, इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा।

जिन उद्देश्यों को लेकर हमारे संत महात्माओं ने त्योहारों को शुरू किया, उससे भटकते जा रहे

रामनवमी प्रसाद ने कहा कि जिन उद्देश्यों को लेकर हमारे संतों और ऋषियों ने पर्व त्योहार शुरू किया था, उससे हमलोग भटकते जा रहे हैं। हमलोग केवल परंपरा मनाते आ रहे हैं। उस समय रावण ने सीता माता का अपहरण किया था। आज समाज में अपहरण आम बात बन चुकी है। यह सब लोगों के संस्कार में कमी के कारण हो रहा है। समाज को हमें बताना होगा कि त्योहार प्रारंभ करने के पीछे उद्देश्य क्या था। संघ ने छह उत्सव मनाने का निर्णय इसी कारण लिया। 

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुदलुम पंचायत के मुखिया जीतू लिंडा ने कहा कि अपनी धर्म संस्कृति को बचाए रखने के लिए संघ को आगे आना होगा। संघ के माध्यम से ही पूरे विश्व का उद्धार होगा। युवा पीढ़ी अपने आप को नहीं पहचान रही है। ऐसी स्थिति में संघ ही मार्गदर्शन कर सकता है। कार्यक्रम में महानगर सह संघचालक सत्यनारायण कंठ, केशव नगर संघचालक नागेंद्र कुमार, नगर कार्यवाह सुबोध कुमार, प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख हरिनारायण, विजय केशरी, नगर बौद्धिक प्रमुख सुनील पांडेय, व्यवस्था प्रमुख सुनील कुमार, रंजीत कुमार राणा, रामाशंकर दुबे, विकास कुमार, प्रदीप केशरी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए।

Edited By: Sujeet Kumar Suman