RSS News: पुराने स्वयंसेवकों को सक्रिय करने में जुटा RSS, समर्थकों को भी जोड़ने की तैयारी; इन छह गतिविधियों पर विशेष जोर
RSS News राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष 2025 तक देश की सभी पंचायतों और नगरों व महानगरों में सभी बस्तियों तक अपने कार्य को पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसको लेकर पुराने स्वयंसेवको को सक्रिय करने में संघ जुट गया है।
रांची, [संजय कुमार]। RSS News राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष 2025 तक देश की सभी पंचायतों और नगरों व महानगरों में सभी बस्तियों तक अपने कार्य को पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कार्य में सहभागी बनने के लिए संघ ने अपने पुराने स्वयंसेवकों को सक्रिय करने का काम शुरू कर दिया है। संघ के पदाधिकारी वैसे स्वयंसेवकों से संपर्क कर रहे हैं, जो किसी कारण से शाखा नहीं जा रहे हैं या पारिवारिक तथा निजी कारणों से संघ कार्य में सक्रिय नहीं हैं। ऐसे स्वयंसेवकों को संघ ने सुषुप्त शक्ति माना है।
साथ ही समाज के वैसे लोगों को भी संघ कार्य से जोड़ने का अभियान शुरू किया गया है, जो आरएसएस के हितैषी हैं, लेकिन अब तक शाखा नहीं गए हैं। ऐसे लोगों से संघ कार्य के लिए समय देने का आग्रह किया जा रहा है। इन लोगों को संघ की छह गतिविधियों के कार्यों से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए संघ के पदाधिकारियों का विशेष अभियान चल रहा है।
गतिविधियों के माध्यम से पंचायतों तक पहुंचने की तैयारी
संघ सूत्रों के अनुसार, आरएसएस का मानना है कि जो लोग शाखा नियमित नहीं जा सकते हैं वैसे लोगों को अपनी गतिविधियों के कार्यों से जोड़ा जाए। समाज के अलग अलग क्षेत्रों में संघ ने अपनी छह गतिविधियों के माध्यम से काम प्रारंभ किया है। इसके माध्यम से ही देश के सभी पंचायतों तक काम पहुंचाने की तैयारी है।
ये छह हैं गतिविधि...
- सामाजिक समरसता,
- कुटुंब प्रबोधन,
- ग्राम विकास,
- गो सेवा,
- धर्म जागरण और
- पर्यावरण संरक्षण।
इन छह गतिविधियों के कार्यों को बढ़ाने पर विशेष जोर
सूत्रों के अनुसार, संघ का विशेष जोर अब इन छह गतिविधियों के कार्यों को बढ़ाने को लेकर ही है। इसके लिए समय-समय पर संघ की ओर से विशेष अभियान भी चलाया जाता है। ग्राम विकास व गो सेवा के तहत प्राकृतिक खेती करने का लोगों से आह्वान किया जा रहा है, तो पर्यावरण संरक्षण के तहत 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक कचरा प्रबंधन पखवाड़ा मनाया जाएगा। संघ प्रमुख अपने सभी संबोधनों में इन गतिविधियों के कार्यों को बढ़ाने पर जोर देते हैं।
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