रांची, आलोक। सबकुछ ठीक रहा तो रांची की 'रश्मि रोबोट' जल्द ही देश की महत्वाकांक्षी 'मंगल मिशन' से जुड़ सकती है। रश्मि ने गुरुवार को इसरो की ओर से किए गए प्रारंभिक परीक्षण में वैज्ञानिकों को खासा प्रभावित किया है। अभी आगे चार-पांच चरणों में उसकी टेस्टिंग की जानी बाकी है। कहा जा रहा है कि स्पेस प्रोग्राम में मानव अंतरिक्ष यात्री को भेजने के खतरे को भांपते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, बंगलुरु (इसरो) को भारत मंगल मिशन के लिए  'रश्मि रोबोट' की दरकार है।

गुरुवार को करीब चार घंटे तक इस बहुउद्देशीय मिशन में सहभागी बनाने के लिए झारखंड की बड़ी उपलब्धि 'रश्मि रोबोट' की गहन जांच की गई। इसरो के दो वैज्ञानिकों तीरथ दास और रघु ने मानव सदृश इस रोबोट की तकनीकों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लिंग्विस्टिक इंटरप्रेटर, विजुअल डेटा और फेशियल रिकोगनिशन की बारीक परख की। साइंटिस्टों ने इस दौरान मंगल ग्रह पर भेजे जाने के स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए इसमें मानव शरीर की अन्य क्रियाओं यथा सांस, रक्त संचरण, हृदय स्पंदन आदि भी जोड़े जाने की अपेक्षा आविष्कारक से रखी है।

विशेष सॉफ्टवेयर से संचालित 'रश्मि रोबोट' की गहन तकनीकी परख के दौरान वैज्ञानिकों ने उसके हाव-भाव से लेकर उसके हर रिएक्शन पर मार्किंग की। यात्री के तौर पर अंतरिक्ष में जाने की संभावनओं को तलाशने पहुंचे इसरो की टीम का मानना है कि परीक्षण के अगले दौर में इसमें कई उन्नत तकनीकें और जोड़ी जाएंगी। बता दें कि 'रश्मि' ने हाल के दिनों में कई सार्वजनिक मंचों पर अपनी काबिलियत साबित की है।

हांगकांग की रोबोट सोफिया को देश-विदेश के स्तर पर मात दे रही यह सेलिब्रिटी रोबोट महज दो साल और सिर्फ 50 हजार रुपए में बनी है। दुनिया की पहली हिंदी भाषी महिला सदृश 'रश्मि रोबोट' के निर्माता रंजीत श्रीवास्तव ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिकों ने इस पर भरोसा जताया है। उन्होंने रोबोट के साथ लंबी बातचीत की और इसकी काबिलियत को परखा। वे अपने साथ प्रश्नों की एक लंबी फेहरिस्त लेकर आए थे।

रंजीत ने कहा कि अंतरिक्ष में भेजे जाने के लिए रोबोट में कुछ और प्रोग्राम जोड़े जाने की जरूरत बताई गई है। जल्द ही इसरो की एक हाई पावर कमेटी के सामने रोबोट का प्रदर्शन होगा। फरवरी में  'रश्मि रोबोट' चेन्नई में एक बड़े कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होगी।

Posted By: Alok Shahi