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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MNREGA: जियो टैगिंग के नए तरीके से मनरेगा में फर्जीवाड़ा पर लगेगा अंकुश, अब पूरी चौहद्दी की ली जाएगी तस्वीर

Published: Sat, 30 Aug 2025 11:33 PM (IST)

मनरेगा योजनाओं में हो रही धोखाधड़ी को रोकने के लिए झारखंड सरकार ने एक नई पहल की है। पहले जियो ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

HighLights

  1. मनरेगा में धोखाधड़ी रोकने के लिए नई पहल |
  2. फेसिंग जियो टैगिंग से चौहद्दी की तस्वीर |
  3. ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी पर रोक |

राज्य ब्यूरो, रांची। मनरेगा के तहत ऐसी अनेक शिकायतें दर्ज हुई हैं कि पूर्व में तैयार योजना के एवज में राशि की निकासी कर ली गई है। इन शिकायतों से बचने के पूर्व में जियो टैगिंग की व्यवस्था लागू की गई और इसके बावजूद गड़बड़ियां होती रहीं।

पता चला कि योजना के किसी एक छोर की तस्वीर लेकर जियो टैगिंग कर दी जाती थी और पूरी चतुराई से पूर्व से बनी योजना की तस्वीर को छिपा लिया जाता था। किसी भी कोने से तस्वीर लेकर उसके लौंगीच्यूड और लैट्टीच्यूड को लिख दिया जाता था।

इसमें कहीं से भी पूर्व की योजना की जानकारी नहीं मिल पाती थी। इसके बाद पूर्व से बनी योजना के एवज में राशि की निकासी करने में घोटालेबाजों को आसानी होती थी। लेकिन, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा।

नई व्यवस्था में कार्यस्थल का फेसिंग जियो टैग करने का निर्देश केंद्र सरकार से प्राप्त हुआ है और शीघ्र ही झारखंड के सभी इलाकों में इसे प्रभावी बनाने का निर्देश जारी कर दिया गया है। इससे पूरी चौहद्दी से संबंधित तस्वीर को जियो टैग करने का प्रविधान किया गया है।

दरअसल फेसिंग शब्द जियो-फेंसिंग के संदर्भ में लिखा गया है। जियो फेंसिंग को एक पूरे भौगोलिक क्षेत्र को परिभाषित करने के लिए उपयोग किया जाता है और अक्सर जियोटैगिंग के साथ मिलकर किसी भी गतिविधि या लेन-देन को एक विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

ऐसे में पूर्व में बने डोभा के एवज में मनरेगा के तहत राशि की निकासी आसानी से नहीं की जा सकेगी। ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण को लेकर भी इस तरह की गड़बड़ियां होती रही हैं।