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    मंत्री रामेश्वर उरांव के 'बिहारी-मारवाड़ी भर गए' वाले बयान से सियासी उबाल, सर्दी में झारखंड का पारा गरम...

    By Alok ShahiEdited By:
    Updated: Mon, 01 Feb 2021 05:00 AM (IST)

    Bihari-Marwadi Captured Ranchi कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव की बिहारी व मारवाड़ी समाज पर टिप्पणी से सियासी उफान आ गया है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तो उरांव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की ही है सत्ता पक्ष भी उनसे खफा नजर आ रहा है।

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    Bihari-Marwadi Captured Ranchi वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव की बिहारी व मारवाड़ी समाज पर टिप्पणी से सियासी उफान आ गया है।

    रांची, राज्य ब्यूरो। Rameshwar Oraon, Bihari-Marwadi Captured Ranchi कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव की बिहारी व मारवाड़ी समाज के संदर्भ में की गई टिप्पणी से राज्य में सियासी उफान आ गया है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की ही है, सत्ता पक्ष भी उनसे खफा नजर आ रहा है। रविवार को इंटरनेट मीडिया पर भी रामेश्वर उरांव के बयान को लेकर दिन पर कटु प्रतिक्रिया देखने को मिली।

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    भाजपा के प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने रामेश्वर उरांव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान की शपथ खाने वाले आज उसकी अवमानना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह को इसका जवाब देना चाहिए। कहा, फूट डालो और राज करो यह कांग्रेस की पुरानी रीति नीति है। यह इनके डीएनए में शामिल है जिसकी अभिव्यक्ति प्रदेश अध्यक्ष के मुंह से हुई है।

    लोकसभा सदस्य संजय सेठ ने कहा कि यह बयान ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि मंत्री की मानसिकता को दर्शाने वाला है। सिर्फ तोड़ने की राजनीति करने वाले कांग्रेसी और कांग्रेस पार्टी को यह जवाब देना चाहिए कि रामेश्वर उरांव ने किस परिस्थिति में ऐसा बयान दिया। रामेश्वर उरांव ने ऐसा बयान देकर संविधान की मर्यादा को भी तार-तार करने का काम किया है।

    उन्‍होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति जब शपथ लेता है तो वह संविधान की शपथ लेता है। देश की संप्रभुता और एकता को अखंड रखने की शपथ लेता है। परंतु रामेश्वर उरांव के इस बयान ने संविधान की मर्यादा को भी तार-तार किया है। नैतिकता के आधार पर उन्हें मंत्रिमंडल से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और झारखंड की जनता से माफी मांगनी चाहिए।