Jharkhand Crime: माओवादियों को रिमांड पर ले पूछताछ करेगी एनआइए, जंगल-पहाड़ों में छिपा रखी है लेवी की राशि
जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन सीपीआइ (माओवादी) के सक्रिय कैडर देवगम और रोहित पदम से एनआइए की टीम रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। एनआइए टोंटो पीएस कांड को टेक ओवर करते हुए जुलाई 2024 में मामला दर्ज किया है। एनआइए की ओर से रिमांड पर लेकर पूछताछ से संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद एनआइए की विशेष अदालत ने अनुमति प्रदान की।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन सीपीआइ (माओवादी) के सक्रिय कैडर देवगम और रोहित पदम से एनआइए की टीम रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
एनआइए टोंटो पीएस कांड को टेक ओवर करते हुए जुलाई 2024 में मामला दर्ज किया है। एनआइए की ओर से रिमांड पर लेकर पूछताछ से संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद एनआइए की विशेष अदालत ने अनुमति प्रदान की।
दोनों आरोपित माओवादी के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा और अजय महतो के संपर्क में था और संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा था। टोंटो थाना अंतर्गत वनग्राम जिम्की इकीर और राजाबासा के आस-पास जंगली-पहाड़ी क्षेत्रों में शीर्ष नक्सलियों ने पूर्व में प्राप्त लेवी का पैसा छिपाकर रखा है।
उग्रवादी संजीत कुमार को नहीं मिली जमानत
अपर न्यायायुक्त कुलदीप की अदालत ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी के एरिया कमांडर संजीत कुमार उर्फ विक्रांत की जमानत याचिका सुनवाई गुरुवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। घटना 23 जनवरी 2025 की है। ओरमांझी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टीएसपीसी के तीन-चार उग्रवादी गुजा स्थित क्रशर प्लांट में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहे हैं।
सूचना पर पुलिस पहुंची तो स्कूटी से आ रहे दो उग्रवादियों ने भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया था कि क्रशर मालिक से लेवी की मांग की गई थी। पैसे देने से इन्कार करने पर घटना को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी।
साजिश रचने के आरोपितों को नहीं मिली अग्रिम जमानत
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अदालत ने फर्जीवाड़े, साजिश रचने सहित अन्य आरोपों में आरोपित शंकर लाल गुप्ता और सुनीता कुमारी गुप्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार किया है।
अदालत ने गुरुवार को दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद खारिज कर दी। मामले को लेकर डेली मार्केट थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता रूपेश जायसवाल ने आरोप लगाया है कि कोंका मौजा स्थित 11.09 डिसमिल भूमि की खरीद के बाद आरोपितों ने कब्जा छोड़ने का दबाव बनाया और रंगदारी की मांग की।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपित फर्जी कागजात के आधार पर जमीन का दावा कर रहा है और गहरी आपराधिक साजिश में शामिल है।
बचाव पक्ष ने इसे महज सिविल विवाद बताते हुए अग्रिम जमानत देने का आग्रह किया। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिसमें जालसाजी, फर्जीवाड़ा और आपराधिक षड्यंत्र शामिल है।
मामले में जांच अभी जारी है। इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
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