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    झारखंड व असम के 4 ठिकानों पर NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, खूंटी से PLFI के सशस्त्र दस्ते का विनोद मुंडा गिरफ्तार

    Updated: Fri, 12 Apr 2024 07:56 PM (IST)

    टेरर फंडिंग मामले में झारखंड में उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ के खिलाफ जांच कर रही एनआईए ने खूंटी जिले से विनोद मुंडा को गिरफ्तार किया है। वह पीएलएफआई के सशस्त्र मारक दस्ते का सक्रिय सदस्य है। वह झारखंड के थानों में दर्ज चार कांडों का वांछित है। एनआइए ने झारखंड के दो व असम के दो यानी कुल चार ठिकानों पर छापेमारी की जिसमें विनोद मुंडा की गिरफ्तारी हुई है।

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    झारखंड व असम के 4 ठिकानों पर NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी। (सांकेतिक फोटो)

    राज्य ब्यूरो, रांची। टेरर फंडिंग मामले में राज्य में उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआइ) के विरुद्ध जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने खूंटी जिले से विनोद मुंडा उर्फ सुक्खवा को गिरफ्तार किया है।

    वह पीएलएफआइ के सशस्त्र मारक दस्ते का सक्रिय सदस्य है और झारखंड के विभिन्न थानों में दर्ज चार कांडों का वांछित है।

    एनआइए ने उसकी निशानदेही पर पीएलएफआइ से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज, दो वाकी-टाकी, पांच मोबाइल, सिमकार्ड व 11 हजार रुपये जब्त किया है।

    एनआइए ने झारखंड के दो व असम के दो यानी कुल चार ठिकानों पर स्थानीय पुलिस के समन्वय से बुधवार को छापेमारी की थी, जिसमें विनोद मुंडा की गिरफ्तारी हुई है।

    कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों से उठा रहे थे लेवी

    एनआइए ने जांच में पाया है कि उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ को मजबूत बनाने के लिए संगठन के उग्रवादी विभिन्न कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों, रेलवे ठेकेदारों, व्यवसायियों आदि से लेवी-रंगदारी वसूल रहे हैं।

    लेवी-रंगदारी वसूलने के लिए ये उग्रवादी झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ व ओडिशा के कारोबारियों-व्यवसायियों को निशाना बना रहे हैं। पूरे मामले की एनआइए जांच जारी है।

    दिनेश के बाद मार्टिन ने संभाली थी संगठन के विस्तार की कमान

    एनआइए को सूचना मिली थी कि पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप की गिरफ्तारी के बाद कमजोर पड़े इस पीएलएफआइ संगठन को एक बार फिर मजबूत करने की कोशिश हो रही थी।

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    संगठन का कुख्यात उग्रवादी मार्टिन केरकेट्टा व अन्य सदस्य पीएलएफआइ का विस्तार व फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे।

    इस सूचना पर एनआइए ने गत वर्ष 11 अक्टूबर 2023 को यूएपी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। इस केस के अनुसंधान के क्रम में पूर्व में दो अन्य आरोपित गिरफ्तार हुए थे, जिनकी निशानदेही पर तीन लाख रुपये नकद, हथियार व कारतूस की बरामदगी हुई थी।

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