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    Hemant Soren: जिस जमीन के लिए हेमंत गिरफ्तार हुए, उसे मूल रैयत को वापस करने का आदेश

    जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ्तारी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में जो जानकारी दी थी उसके आधार पर उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताया था। आवेदन में कहा गया है कि बरियातू की जिस 8.5 एकड़ जमीन को हड़पने की कोशिश मामले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था उस जमीन का पूरा इतिहास हेमंत ने याचिका के साथ संलग्न किया था।

    By Dilip Kumar Edited By: Shashank ShekharUpdated: Tue, 06 Feb 2024 10:04 PM (IST)
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    Hemant Soren: जिस जमीन के लिए हेमंत गिरफ्तार हुए, उसे मूल रैयत को वापस करने का आदेश (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, रांची। जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ्तारी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में जो जानकारी दी थी, उसके आधार पर उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताया था।

    आवेदन में कहा गया है कि बरियातू की जिस 8.5 एकड़ जमीन को हड़पने की कोशिश मामले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था, उस जमीन का पूरा इतिहास हेमंत ने याचिका के साथ संलग्न किया था। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय से हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिली थी और उनकी याचिका खारिज हो गई थी।

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    याचिका में बताया गया था कि बरियातू में बड़गाईं अंचल की उक्त विवादित 8.5 एकड़ जमीन की जमाबंदी रद्द करने व उसे असली रैयत को वापस करने के लिए एसएआर कोर्ट ने 29 जनवरी 2024 को आदेश भी दे दिया था।

    एसएआर कोर्ट ने दिया ये आदेश

    पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका के साथ एसएआर केस नंबर 81/23-24 में रांची की स्पेशल रेगुलेशन अधिकारी मनीषा तिर्की की अदालत से 29 जनवरी 2024 को जारी आदेश की कॉपी भी संलग्न की गई है। यह केस राजकुमार पाहन बनाम बुधन राम व अन्य से संबंधित था, जिसमें एसएआर कोर्ट ने अंचलाधिकारी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह आदेश दिया था कि उक्त जमीन सीएनटी एक्ट के अधीन है, जिसकी गलत तरीके से खरीद-बिक्री व जमाबंदी की गई है।

    उस जमीन पर गलत तरीके से की गई जमाबंदी को रद्द करते हुए, उस पर बने ढांचा को नष्ट कर उस जमीन को मूल रैयत को वापस करें। उस जमीन की जांच रिपोर्ट में बड़गाईं अंचल के सक्षम पदाधिकारियों ने बताया था कि आवेदक राजकुमार पाहन के नाम पर बाकास्त भुइहरी पहनई जमीन व बुधु पाहन व अन्य के नाम पर कुछ जमीन है।

    इस जमीन पर कई गैर आदिवासियों ने अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की और उनके नाम पर जमाबंदी व कब्जा है। एसएआर कोर्ट से उन्हें नोटिस दिया गया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद उनकी जमाबंदी रद करने व उन्हें जमीन खाली करने संबंधित आदेश जारी किया गया है। यह सीएनटी एक्ट के तहत आदेश जारी हुआ है।

    छापामारी के बाद जमीन वापसी की तेज हुई प्रक्रिया

    ईडी की छानबीन में यह स्पष्ट हुआ है कि जमीन घोटाला प्रकरण में बड़गाईं अंचल के तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद की गिरफ्तारी, उनके ठिकाने से बरामद दस्तावेज, मोबाइल में मिले सबूत के बाद ईडी सक्रिय हुई।

    भानु प्रताप प्रसाद के मोबाइल में बॉस की जिस जमीन की जिक्र था, उसके बारे में भानु ने ईडी को बताया था कि वह हेमंत सोरेन की जमीन है। हालांकि, जमीन के दस्तावेज में कहीं भी हेमंत सोरेन का नाम नहीं है। ईडी की छानबीन में स्पष्ट हुआ है कि उनके व उनके पारिवारिक सदस्यों के नाम पर उक्त जमीन की जाली कागजात तैयार कर हड़पने की कोशिश चल रही थी। इससे पहले ईडी की दबिश बढ़ गई।

    14 अगस्त 2023 को हेमंत को किया गया था पहला समन  

    जब जमीन का इतिहास खंगाला जाने लगा और इस मामले में हेमंत सोरेन को 14 अगस्त 2023 को पहला समन किया गया, उसके बाद ही सरकारी तंत्र कागजात को दुरुस्त करने में जुट गया। बड़गाईं अंचल की जांच रिपोर्ट, एसएआर कोर्ट का आदेश उसी कार्रवाई का एक हिस्सा है।

    इसमें जमीन मालिक के माध्यम से आवेदन दिलवाने से लेकर उसके पक्ष में फैसला आने तक की कार्रवाई शामिल है। 29 जनवरी को जब जमीन घोटाला केस में ईडी ने हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी की थी, उसी दिन एसएआर कोर्ट का जमीन वापसी को लेकर फैसला भी आ गया था।

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