राज्य ब्यूरो, रांची। आतंक का पर्याय दुर्दांत माओवादी कुंदन पाहन ने आखिरकार हथियार डाल दिए। रविवार को डीआइजी रांची रेंज अमोल वीणुकांत होमकर के कार्यालय परिसर में ऑपरेशन ‘नई दिशा’ के तहत कुंदन का विधिवत सरेंडर कराया गया। भाकपा माओवादी के इस रिजनल सचिव पर 15 लाख रुपये का इनाम था। सरेंडर के बाद कुंदन ने कई सनसनीखेज खुलासे किए।

दावा किया कि नेपाल के मौजूदा प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के साथ उसने वर्ष 2000 में बोकारो के झुमरा पहाड़ में गुरिल्ला वार की विधिवत ट्रेनिंग ली थी। 15 दिनों की यह ट्रेनिंग पश्चिम बंगाल से आए माओवादी नेता मनीष दा ने दी थी। नेपाल के माओवादियों से झारखंड के माओवादियों का अच्छा कनेक्शन है।

समर्पण के बाद कुंदन को इनाम की राशि 15 लाख रुपये का चेक दिया गया। ऑपरेशन ‘नई दिशा’ के तहत उसे अनुदान की पांच लाख की राशि और मिलेगी। समर्पण के बाद उसे कोर्ट में पेश कर बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया। जहां उसे आम कैदी वार्ड में रखा गया है। शीघ्र ही पाहन को हजारीबाग स्थित खुला जेल में ट्रांसफर किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

128 संगीन वारदातों को दिया अंजाम:
पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा, सांसद सुनील महतो, डीएसपी प्रमोद कुमार और इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार की हत्या और आइसीआइसीआइ बैंक के वैन से पांच करोड़ रुपये और सोने की लूट जैसी 128 संगीन वारदातों को कुंदन ने अंजाम दिया था। इनमें रांची में 42, खूंटी में 50, चाईबासा में 27, सरायकेला में 07, गुमला और रामगढ़ में एक-एक मामला शामिल है।’

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Posted By: Sachin Mishra

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