रांची में लालपुर में रुकते थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस
झारखंड विशेषकर रांची से नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काफी गहरा नाता है।
जागरण संवाददाता, रांची : झारखंड विशेषकर रांची से नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काफी गहरा नाता है। वो रांची अक्सर आया जाया करते थे। इसके कई कारण थे उसमें सबसे बड़ा कारण रांची में बंग समाज के पढ़े लिखे लोगों की बहुआयत भी है। नेताजी जब रांची आते तो फणींद्रनाथ आयकत के घर पर रहते थे। इसके अलावा वो सरकुलर रोड में क्रांतिकारी यदुगोपाल मुखर्जी के यहां आते जाते रहते थे। उस वक्त यदुगोपाल मुखर्जी के बेटे डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी उस घर में रहते थे। वो उनके घर पर कई घंटे देश की विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए बिताते थे।
बताया जाता है कि रामगढ़ में 17 मार्च 1940 में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने आए थे। इसके लिए वो पहले चाईबासा आए फिर यहां से सड़क के रास्ते रामगढ़ गए थे। पटना के मशहूर डॉ. पीएन चटर्जी उन्हे अपनी विंटेज कार से यहां लेकर आए थे। ये अधिवेशन बड़ा एतिहासिक हुआ था। नेताजी महात्मा गांधी के साथ मंच पर बैठे थे और अधिवेशन के बाद उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा की थी। इसमें उन्हें स्वामी सहजानंद सरस्वती का भी साथ मिला था। इसके के एक साल बाद उन्होंने देश छोड़ दिया था। 16 जनवरी 1941 की रात करीब 1.30 बजे वो अपना वेश बदलकर घर से निकले। इसके बाद जर्मन वांडरर कार से जीटी रोड के रास्ते आसनसोल और वहां से धनबाद गये। वहां से नेताजी 17 जनवरी 1941 को बरारी में अपने भतीजे अशोकनाथ बोस के यहां गए। वहां कुछ देर रुकने के बाद वो अपने दोनों भतीजे और उनकी पत्नी के साथ गोमो स्टेशन गए। यहां उन्होंने अपने भतीजों को वापस जाने के लिए आदेश दिया। गोमो से नेताजी सुभाषचंद्र ने दिल्ली कालका मेल पकड़ी। इसके बाद 18 जनवरी 1941को दिल्ली से पेशावर जाने के लिए फ्रंटियर ट्रेन पकड़ी। बताया जाता है कि 19 जनवरी को नेता जी पेशावर छावनी पहुंचे। मगर 26 जनवरी 1941 को ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को चकमा देकर गायब हो गये।
------------------------कोयलाचंल में सुरक्षित है नेताजी की इस्तेमाल की गई कार नेताजी सुभाष चंद्र बोस कई बार झरिया और कोयलाचंल के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया था। उन्होंने कई बार कोयला मजदूरों के साथ बैठक भी की थी। बताया जाता है कि धनबाद के बरारी कोक प्लाट में नेताजी के एक रिश्तेदार अभियंता पद पर कार्यरत थे। झरिया के तिलक भवन में क्रांतिकारियों के साथ एक गुप्त बैठक की थी। यहां आज भी उनकी स्मृतियों को संभाल कर रखा गया है। वहीं यहां के राज मैदान में उन्होंने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन को संबोधित किया था। इस सबसे महत्वपुर्ण बात ये है कि कोलकाता से निकलने के बाद गोमो तक नेताजी ने जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया था। वो आज भी यहां संरक्षित है। बीसीसीएल के गेस्ट हाउस में उस कार को रखा गया है। इसकी देखभाल बीसीसीएल के द्वारा ही की जा रही है।
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