Monkeypox in Jharkhand: पालतू जानवरों से मंकीपाक्स का खतरा, सरकारी अलर्ट जारी, अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड रेडी
Monkeypox in India झारखंड में भी मंकीपाक्स फैलने का खतरा बढ़ गया है। झारखंड सरकार ने इसे देखते हुए जिलों को अलर्ट और एडवाइजरी जारी किया है। जिला अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इस बीमारी की दवा है न वैक्सीन।

रांची, जागरण संवाददाता। देश में मंकीपाक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए झारखंड में दहशत का आलम है। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया है। सिविल सर्जन को सदर अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने को कहा गया है। जिलों में तेजी से आइसोलेशन वार्ड तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। मंकीपाक्स के मरीजों को यहां रखकर इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जन को इस संबंध में एक एडवाइजरी भी जारी किया है।
रांची सदर अस्पताल के दूसरे तल्ले पर बना वार्ड
राजधानी रांची के सदर अस्पातल में तो मंकीपाक्स के इलाज के लिए ऊपरी तल्ले पर आइसोलेशन वार्ड बना भी दिया गया है। यहां पर करीब 20 बेड रखे गए हैं। मंकीपाक्स के मरीजों को यहीं रखा जाएगा। चौबीस घंटे वह डाक्टरों की निगरानी में ही रहेंगे। वहीं, सदर अस्पातल में कोरोना संक्रमितों के लिए तीसरे तल्ले पर इलाज के लिए पहले से व्यवस्था है।
इस बीमारी की कोई दवा अबतक नहीं
रांची के सिविल सर्जन डा विनोद कुमार ने बताया कि मंकीपाक्स् बीमारी की रोकथाम या इलाज के लिए ना ही कोई वैक्सीन है, और ना ही कोई दवा उपलब्ध है। हालांकि, यह जानलेवा संक्रमण नहीं है, लेकिन तैयारी को लेकर आइसोलेटेड वार्ड तैयार किया गया है। साथ ही सीएचसी को भी इससे निपटने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मालूम हो कि केरल के बाद दिल्ली में भी मंकीपाक्स के मामले मिलने के बाद झारखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
पालतू जानवरों से फैल सकता मंकीपाक्स
सिविल सर्जन ने बताया कि यह बीमारी जानवरों से फैलती है। खासकर कुत्ता से फैलने के प्रमाण मिल रहे हैं। दूसरी ओर, पालतू जानवर से भी यह बीमारी फैल सकती है। इसलिए जरूरी है कि सतर्कता बरती जाए और जानवरों से दूरी बनाकर ही रहा जाए। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से मौत तो नहीं होती है लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन्हें यह बीमारी हो सकती है। सबसे अधिक खतरा मधुमेह, कैंसर व टीबी बीमारी से ग्रस्त लोगों को है।
जानें, मंकीपाक्स बीमारी के मुख्य लक्षण
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मांसपेशी में दर्द, बुखार, चेचक जैसा चकत्ता और शरीर पर दाने-दाने आदि होता है। शुरुआत में ही इस बीमारी को पहचान कर इलाज किया जा सकता है। डा विनोद बताते हैं इसका इलाज सिंपटोमेटिक के रूप में किया जाता है। मरीज के लक्षण देखकर ही इसकी दवा दी जाती है। हालांकि, इस बीमारी के लिए कोई उपयुक्त दवा नहीं है। मंकीपाक्स चेचक से मिलती-जुलती बीमारी है। यह एक ऑर्थोपॉक्सवायरस संक्रमण है। इसकी अवधि आमतौर पर 7-14 दिन होती है, लेकिन यह 5-21 दिनों तक हो सकती है। संक्रमित व्यक्ति लक्षण प्रकट होने के एक दिन पहले से रोग फैला सकता है। इंसान से इंसानों में भी फैल सकती है। यह वायरस सांस व आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती है।
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