Jharkhand Cabinet Ministers: कौन हैं वो 11 'खिलाड़ी', जिनके साथ सियासी 'पिच' पर उतरे हेमंत सोरेन
झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद 11 नए मंत्रियों ने शपथ ली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की टीम में शामिल इन खिलाड़ियों के बारे में जानें। दीपक बिरुआ से लेकर योगेंद्र प्रसाद यादव तक इन मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता राजनीतिक अनुभव और प्राथमिकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। हेमंत सोरेन ने अपने नए मंत्रिमंडल से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
राज्य ब्यूरो, रांची। Jharkhand Cabinet Ministers झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रिपरिषद का बंटवारा भी हो चुका है। हेमंत सोरेन (Hemant Soren Cabinet) की टीम में 11 'खिलाड़ी' हैं। चाईबासा से विधायक दीपक बिरुआ, बिशुनपुर से चमरा लिंडा, घाटशिला से रामदास सोरेन, मधुपुर से हफीजुल हसन, गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार मंत्री बनाए गए हैं।
वहीं, गोड्डा सीट से विधायक बने संजय प्रसाद यादव, छत्तरपुर से राधाकृष्ण किशोर, जामताड़ा से डॉ. इरफान अंसारी, महगामा से दीपिका पांडेय सिंह, मांडर विधानसभा क्षेत्र से शिल्पी नेहा तिर्की और गोमिया से योगेंद्र प्रसाद यादव को भी हेमंत कैबिनेट में जगह मिली है।
कौन हैं हेमंत के 11 'खिलाड़ी'?
दीपक बिरुवा
चाईबासा के विधायक दीपक बिरुवा इतिहास में स्नातक हैं। वे अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में भी सक्रिय रहे हैं। एक जनवरी 1964 को जन्में दीपक विरुवा वर्ष 2009 से लगातार झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हो रहे हैं। वे झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन को अपना आदर्श मानते हैं। सादा भोजन करने वाले दीपक बिरुवा की फुटबाल में रूचि है। वे पूर्ववर्ती सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वे विधानसभा की प्राक्कलन समिति के सभापति के अलावा परामर्शदात्री परिषद और आश्वासन समिति के सदस्य रहे हैं। जनसेवा और क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता है।
चमरा लिंडा
छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में आए चमरा लिंडा बिशुनपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे 2009 से लगातार झारखंड विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हुए हैं। पहली बार वे मंत्री बनाए गए हैं। स्नातक चमरा लिंडा की खेलकूद में रूचि है। वे विधानसभा में सत्तारूढ दल के सचेतक रह चुके हैं।
रामदास सोरेन
रामदास सोरेन घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं। वे झारखंड अलग राज्य आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। एक जनवरी 1963 को जन्में रामदास सोरेन मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। स्नातक तक उनकी शिक्षा हुई है। वे तीन बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। झारखंड आंदोलन के दौरान वे कई बार जेल गए। वे झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन को अपना आदर्श मानते हैं। रामदास सोरेन झामुमो के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
हफीजुल हसन
मधुपुर के विधायक हफीजुल हसन उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। उन्होंने खनन में इंजीनियरिंग की है। छह जनवरी 1974 को देवघर के मारगोमुंडा में जन्में हफीजुल हसन पहले भी मंत्री रह चुके हैं। उनके पिता हाजी हुसैन अंसारी भी राज्य सरकार में मंत्री रहे हैं। उनके असामयिक निधन के बाद हुए उपचुनाव में वे पहली बार जीत हासिल कर मंत्री बने। राजनीति में अपने पिता के साथ वे झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन और लालू प्रसाद को अपना आदर्श मानते हैं। अध्ययन, खेलकूद एवं कृषि कार्य में इनकी रूचि है।
सुदिव्य कुमार
गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार की शिक्षा इंटरमीडिएट तक हुई है। 2019 में वे पहली बार निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे थे। महात्मा गांधी और शिबू सोरेन को आदर्श मानने वाले सुदिव्य कुमार की शिक्षा गिरिडीह में ही हुई है। वे चीन और इंडोनेशिया की यात्रा कर चुके हैं। क्षेत्र के विकास को वे अपनी प्राथमिकता बताते हैं। 26 जुलाई 1970 को जन्में सुदिव्य विधानसभा की लोक लेखा समिति और सामान्य प्रयोजन एवं प्रत्यायुक्त विधान समिति के सदस्य रह चुके हैं।
संजय प्रसाद यादव
हेमंत कैबिनेट में राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव लालू प्रसाद के करीबी रहे हैं। वे संयुक्त बिहार में 1999, अलग राज्य बनने के बाद 2009 व अब 2024 में गोड्डा विधानसभा सीट से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे हैं। वे राजद झारखंड प्रदेश के प्रधान महासचिव भी हैं। उन्होंने हिंदी विद्यापीठ देवघर से साहित्य भूषण की उपाधि ली है। गोड्डा से सटे बिहार के बांका जिले के रहने वाले संजय प्रसाद यादव के भाई मनोज यादव बिहार में जदयू के विधायक हैं।
राधाकृष्ण किशोर
मंत्रिमंडल के सबसे अनुभवी चेहरों में शामिल राधाकृष्ण किशोर छत्तरपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह संयुक्त बिहार में भी इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। डालटनगंज के गणेश लाल अग्रवाल कालेज से इन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई 1973 में पूरी की है। इनकी पत्नी रांची विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर इन्हें कई क्षेत्रों में काम करने का अनुभव रहा है। किशोर ने कभी समझौतावादी राजनीति को स्वीकार नहीं किया और यही कारण है कि कभी एक दल से बंधकर नहीं रहे। कांग्रेस से विधायक बनने के पूर्व वे राजद, भाजपा, आजसू और जदयू जैसे दलों में रहे हैं।
डॉ. इरफान अंसारी
वर्तमान मंत्रिमंडल में सबसे अधिक पढ़े-लिखे मंत्रियों में शामिल डॉ. इरफान अंसारी लगातार तीसरी बाद जामताड़ा से विधायक बने हैं। अंसारी ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमडी की पढ़ाई भी की है। 1975 में जन्में इरफान अंसारी के अनुसार उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति और किसान के रूप में रही है। विरासत की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए इरफान ने एक नया मुकाम हासिल किया है। इनके पिता फुरकान अंसारी विधायक और सांसद भी रह चुके हैं। पिछले दो टर्म में इन्होंने अपनी पहचान खुलकर बोलनेवाले नेताओं के तौर पर बनाई है और कई बार इन्होंने अपनी पार्टी के मंत्रियों की भी खुलकर आलोचना की है।
दीपिका पांडेय सिंह
कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह लगातार दूसरी बार महगावां से विधायक बनी हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि से आनेवाली दीपिका की माता प्रतिभा पांडेय लंबे समय तक भाजपा में रही हैं। दीपिका ने बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमबीए और एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की है। पिछले विधानसभा में वह सामान्य प्रयोजन समिति, सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति में सदस्य भी रही हैं। इन्होंने अमेरिका, कनाडा, यूके, चीन, इंडोनेशिया समेत कई देशों की यात्रा भी की है। पिछले कैबिनेट में इन्हें कृषि मंत्री का दर्जा मिला था। कृषि मंत्री के तौर पर इन्होंने दो लाख तक की कर्जमाफी का निर्णय लिया था।
शिल्पी नेहा तिर्की
शिल्पी नेहा तिर्की लगातार दूसरी बार मांडर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनी हैं। राजनीतिक परिवेश से आनेवाली शिल्पी के पिता बंधु तिर्की भी मांडर से विधायक रह चुके हैं। बंधु के पास झारखंड के शिक्षा मंत्री के तौर पर काम करने का अनुभव रहा है। एक आपराधिक मामले में सजा पाने के बाद उनकी विधायकी छिन गई थी जिसके बाद हुए 2022 में हुए मध्याविधि चुनाव में शिल्पी ने जीत हासिल की और दोबारा 2024 में भी इन्होंने जीत दर्ज की है।
पंडित नेहरू और प्रियंका गांधी को अपना आदर्श माननेवाली शिल्पी ने मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा की पढ़ाई की है। इनके पति मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं। शिल्पी ने इंडोनेशिया, श्रीलंका और नेपाल की यात्राएं की हैं।
योगेंद्र प्रसाद महतो
योगेंद्र महतो गोमिया से दूसरी बार विधायक बने हैं। वे रामगढ़ जिले के मुरूबंदा निवासी हैं। कांग्रेस में पंचायत अध्यक्ष के रूप में राजनीति शुरू की थी। फिर जिलाध्यक्ष से लेकर विधायक बनने का सफरनामा दिलचस्प संघर्ष से भरा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने आजसू छोड़ झामुमो का दामन थाम लिया।
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