रांची, जेएनएन: रांची सहित पूरे झारखंड में विकास भारती संस्था सेवा, विकास और जनोत्थान के कार्य कर रही है। इस संस्था का एकमात्र लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का सामाजिक व आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है। बिशुनपुर गुमला समेत कई हिस्सों में यह संस्था सरकार के विकास कार्यों में भी भागीदार है। सुशिक्षित, स्वस्थ और समृद्ध झारखंड के सपने के साथ संस्था बेहतर समाज और राष्ट्र निर्माण में जुटी है। ग्रामीणों को उन्नत खेती के प्रशिक्षण देकर संस्था उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। साथ ही अचार-पापड़, मुरब्बा, दवाइयां, जैम उत्पादों समेत औषधीय खेती और उनसे उत्पाद बनाकर मेहनतकशों को बाजार भी उपलब्ध करा रही है।

संस्था की ओर से रांची में आरोग्य भवन स्थित अपने केंद्र पर अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं एवं गरीब लोगों के लिए कई तरह के कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लोग यहां से प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार खड़ा कर रहे हैं। संस्था के कार्यकर्ता स्वच्छता, जल संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। रांची सहित पूरे राज्य में यह अभियान चल रहा है। इस वर्ष संस्था की ओर से राज्य में लाखों पेड़ लगाए गए। मलेरिया और डायरिया के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

राज्यभर में चल रहा बोरा बांध अभियान
संस्था की ओर से राज्यभर में जल संरक्षण के लिए नदियों पर बोरा बांध बनवाने और डोभा निर्माण करवाया जा रहा है। झारखंड सरकार के साथ मिलकर सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से संस्था के कार्यकर्ता किसानों को हर तरह की सुविधाएं पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस संस्था के मुखिया पद्मश्री अशोक भगत हैं,जिन्होंने सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।

इनके अनुभवों का लाभ लेने के लिए झारखंड सहित देश के कई संगठन इन्हें आमंत्रित करते रहते हैं। केंद्र सरकार के कई विभागों ने इन्हें सदस्य बनाया है। वर्ष 1983 में विकास भारती की स्थापना की गई उससे आज दो हजार से अधिक कार्यकर्ता जुड़े हैं। संस्था के कामों को देखने के लिए केंद्र सरकार के मंत्री व अधिकारी भी समय-समय पर आते रहते हैं।

संस्था का उद्देश्य
- आदिवासियों के ग्रामीण जनसमूह की देशज तकनीक का संवर्धन, झारखंड की सांस्कृतिक विरासत एवं जनजातीय सुसंस्कार की रक्षा करना।
-झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा एवं संवर्धन।
-मानव क्षमता का उपयोग कर जनसमूह एवं मानव संसाधन विकास को प्रोत्साहित करना।
-सहभागी योजना एवं विकास की प्रक्रिया हेतु आदिवासियों, ग्रामीण जनता, सीमांत कृषकों,
भूमिहीन श्रमिकों, कारीगरों, युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों को आत्मविश्वासी बनाना।
-जनजातीय पुरुष एवं महिलाओं का सशक्तिकरण कर उन्हें स्वाभिमानी एवं स्वावलम्बी बनाना।

चलाए कई आंदोलन
-जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के हक को लेकर 1986 के बाद से ही विकास भारती बिशुनपुर ने आंदोलन चलाया। आदिवासियों का आह्वान किया कि गांव को संगठित करो,
जल-जंगल-जमीन आपका है। इसकी रक्षा आप ही कर सकते हो।
- रांची सहित पूरे राज्य में जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण के लिए अभियान
- रांची में हरमू नदी को बचाने के लिए आंदोलन।
-हर बच्चा शिक्षित हो इसके लिए अनौपचारिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, श्रम निकेतन और
एकल शिक्षा योजना शुरू की।
-श्रम विद्या मंदिर स्वावलंबन की दिशा में विकास भारती द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व प्रयोग है। विकास भारती ने अपने कार्यक्षेत्र में 12 श्रम विद्या मंदिरों का निर्माण कराया है। यहां शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की कार्य ऊर्जा को तराशा जाता है, जिससे वो भविष्य में परिवेश आधारित रोजगार को अपनाकर गांव के आर्थिक विकास में अपने
समाज की मजबूती को कारगर आधार प्रदान कर सके। इन स्कूलों में सैकड़ों बच्चे अध्ययन कर रहे हैं।

परंपरागत तकनीक व हुनर का संरक्षण व विकास
विकास भारती ने परंपरागत तकनीकों यथा बांसकला, मल्लारगिरि, बढ़ईगिरि को पुनर्र्जीवित करने हेतु 10000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने का काम किया। इसके साथ ही मोटरसाइकिल मरम्‍मत, खाद्य प्रसंस्करण, सब्जी उत्पादन एवं बिक्री, राजमिस्त्री का कार्य, डीजल पंप, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल वायरिंग आदि
में युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।

किसानों को दे रहे प्रशिक्षण
विकास भारती की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है। खेती के अलग-अलग प्रयोग किए जा रहे हैं। संस्था अपने विविध प्रकल्पों यथा स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं इससे संबद्ध सेवाओं बागवानी मिशन, वानिकी तथा कौशल विकास के माध्यम से गरीब लोगों के लिए कई तरह के काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्र के युवा-युवतियों में स्वाभिमान एवं स्वावलम्बन की भावना जागृत करने तथा राज्य की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का कार्य अनवरत जारी है।

200 प्रखंडों में चल रहा काम
संस्था द्वारा झारखंड राज्य के 24 जिलों के 200 प्रखंडों के 3500 पंचायतों के अंतर्गत लगभग 15000 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जन संगठन, ग्राम तकनीकी, कृषि, बागवानी मिशन, तकनीकी विकास तथा महिला एवं बाल विकास का कार्य बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है।

 

By Krishan Kumar