रांची, जेएनएन। विद्या भारती के प्रयास से राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव दिख रहा है। सरस्वती विद्या मंदिर और शिशु मंदिरों में बच्चे संस्कार के साथ आधुनिक शिक्षा पा रहे हैं। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के दौर में इन स्कूलों की सफलता एक अलग ही कहानी कहती है। खास बात यह है कि इन स्कूलों की फीस भी कम है ।

इन स्कूलों में कम शुल्क लेकर बच्चों को संस्कारित और सुशिक्षित किया जा रहा है। यहां पढ़े बच्चे देश-विदेश खेल के क्षेत्र में भी आगे हैं। पिछले कई वर्षों से सीबीएसई के 10वीं एवं 12वीं कक्षा के रिजल्ट में भी इन स्कूलों के बच्चे टॉप फाइव में अपना स्थान बना रहे हैं। प्रसिद्ध समाजसेवी नानाजी देशमुख, भाऊराव देवरस व कृष्णचंद्र गांधी जैसे लोगों के प्रयास से 1952 में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की स्थापना की गई थी।

1977 में हुई विद्या भारती की स्थापना
इन स्कूलों के संचालन के लिए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की स्थापना 1977 में की गई। अखिल भारतीय, क्षेत्रीय तथा प्रांतीय समिति के दिशा-निर्देशन में स्थानीय प्रबंधकारिणी समिति विद्यालय का संचालन करती है। इसमें समाज के लोगों को शामिल किया जाता है। इन्हीं लोगों की देखरेख में स्कूलों का संचालन होता है। झारखंड में विद्या विकास समिति की ओर से 120, वनांचल शिक्षा समिति की ओर से 126 तथा जनजातीय शिक्षा समिति की ओर से 9 विद्यालय चलाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में 1 लाख 80 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सके और उसका जीवन ग्रामों, वनों, झुग्गी-झोपडिय़ों में निवास करने वाले दीन-दु:खी अभावग्रस्त अपने बांधवों को सामाजिक कुरीतियों, शोषण एवं अन्यास से मुक्त कराकर राष्ट्र जीवन को समरस, सुसंपन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित हो।
राम अवतार नारसरिया, मंत्री, विद्या विकास समित, झारखंड

By Krishan Kumar