झारखंड की राजधानी रांची पर प्रकृति ने अपने सौंदर्य को खुलकर लुटाया है। रांची उरांव शब्द रअयची से निकला है, जिसका मतलब है। रहने दो। पौराणिक कथाओं के अनुसार आत्मा के साथ विवाद के बाद एक किसान ने अपने बांस से आत्मा को हराया। आत्मा रअयची, रअयची चिल्लाते हुए गायब हो गया। समय के साथ रअयची, राची हुई और अब रांची हो गई है।

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छोटा नागपुर पठार के दक्षिणी हिस्से में स्थित में यह शहर झारखंड आंदोलन का केंद्र रहा है। इस आंदोलन में दक्षिणी बिहार, बंगाल का पश्चिमी और पूर्वी हिस्सा और उत्तरी ओड़िशा को मिलाकर आदिवासियों के लिए अलग राज्य की मांग थी। लंबे संघर्ष के बाद झारखंड ने 15 नवंबर 2000 को मौजूदा आकार लिया था।

रांची का इतिहास सम्राट अशोक से लेकर समुद्रगुप्त तक मिलता है। अशोक के समय यह मगध का हिस्सा था, तो मौर्य वंश के कमजोर पड़ने के बाद कलिंग के राजाओं ने इस पर शासन किया। कहा जाता है कि दक्षिण के जाते समय समुद्रगुप्त (335-380 AD) भी रांची से होकर निकले थे।

घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से भरा रांची शहर देश के खनिज उत्पादन में 18 प्रतिशत का योगदान अकेले देता है, जिसके चलते इस मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट की भी संज्ञा मिली है। रांची झारखंड का तेजी से उभरता शहर है, जो आधुनिकता के साथ परंपरा को सहेजे तेजी से आगे बढ़ रहा है। आदिवासी संस्कृति और उनकी बहुलता इसे खास बनाती हैं।

धार्मिक रूप से रांची समय-समय पर अलग-अलग धर्मों के प्रभाव में रहा है। बुद्ध, जैन, मुगल शासकों और हिंदू शासकों की छाप दिखती है। इसी तरह रांची की धार्मिक पहचान भी मिश्रित है। यहां चर्च, मंदिर, मस्जिद और बौद्ध के साथ जैनियों के धार्मिक स्थल आपको मिल जाएंगे। जो विविधता में एकता की खूबसूरती को दर्शाते हैं। स्थानीय आदिवासी अपने सरना धर्म का पालन करते हैं और इनकी एक बड़ी ईसाइयत को मानती है, जो उनकी संस्कृति में भी दिखती है।

पारंपरिक लोक गीत और नृत्य यहां की संस्कृति की झलक दिखाते हैं। हिंदी, मुंडारी, नागपुरी , कुरमुली और उरांव रांची की प्रमुख भाषाएं हैं। यहां का डोकरा आर्ट जगप्रसिद्ध है। उरांव भित्तिचित्र, जादो पाटिया और संथाली भित्तिचित्र रांची की कला संस्कृति को विश्व पटल पर अलग स्थान दिलाते हैं।

रांची शहर की औद्योगिक क्षमता को उद्योग और सरकार ने समान रूप से पहचाना है और दोनों से ही रांची को महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त हो रहा है। उभरते हुए भारतीय शहरों में सकल घरेलू उत्पाद और रोजगार पैदा करने में सबसे आगे रहने वाले शहरों में से एक रांची एक प्रभावशाली शहर के रूप में उभर रहा है। यह भारत के भविष्य का शहर है।

रांची को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकसित किए जाने का प्लान है। इसकी पहचान दुनिया के बेहतरीन कप्तान और भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के शहर के रूप में भी जाना जाता है।

प्राकृतिक सुंदरता के साथ रांची ने अपने खूबसूरत पर्यटक स्थलों के साथ दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई है। गोंडा हिल, रॉक गॉर्डन, मछली घर, बिरसा जैविक उद्यान, टैगोर हिल, मैकक्लुस्किलगंज और आदिवासी संग्रहालय रांची का श्रृंगार हैं।

रांची आने वाले लोग इसके झरनों के झुरमुट में अपना दिन गुजारना नहीं भूलते हैं। यहां का पांच गाघ झरना सबसे खूबसूरत है, क्योंकि यह पांच धाराओं में गिरता है। झरने और पर्यटन स्थल रांची को पर्यटन का स्वर्ग बनाते हैं। हजारों लोग हर साल छुट्टी मनाने रांची चले आते हैं।

रांची स्थित टैगोर पहाड़ी शहर का मुकुट है, जिसका क्रेज पर्यटकों के बीच देखते ही बनता है। इस पहाड़ी से शहर के मनोहारी दृश्य देखे जा सकते हैं। यहां शांतिधाम भी बना हुआ है, जिसका निर्माण गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के बड़े भाई ने कराया था।

रांची के मुख्य आकर्षण

गोंडा हिल और रॉक गॉर्डन
रांची में पर्यटक गोंडा हिल और रॉक गॉर्डन की सैर पर जा सकते हैं। रॉक गॉर्डन को गोंडा हिल की चट्टानों का काटकर बनाया गया है। इस पार्क के अलावा गोंडा हिल की तराई में एक बांध का निर्माण भी किया गया है, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।

मछली घर और मूटा मगरमच्छ प्रजनन केंद्र
गोंडा हिल पर पिकनिक मनाने के अलावा पर्यटक रांची में मछली घर और मूटा मगरमच्छ प्रजनन केंद्र देखने जा सकते हैं। मछली घर में पर्यटक अलग-अलग रंगों की मछलियों को देख और खरीद सकते हैं। मगरमच्छ प्रजनन केंद्र में 50 मगरमच्छों को देखा जा सकता है।

मैकक्लुस्किगंज
यूरोपियन शैली के बंगलों और आदिवासी संग्रहालय के लिए मैक क्लुस्किगंज और स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों में बहुत लोकप्रिय है।

झरनों का शहर
रांची के झरनों में जोन्हा झरना बहुत खास है। इस झरने के पास भगवान बुद्ध के मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं। पर्यटकों को यह झरना खासतौर से आकर्षित करता है। इसके अलावा दशम जलप्रपात, जोन्हा जलप्रपात, हुन्डरू जलप्रपात के साथ जगन्नाथपुर मंदिर पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।

क्रिकेट स्टेडियम

रांची, भारत में धर्म की संज्ञा पा चुके क्रिकेट का नया गढ़ है। विश्व पटल पर महेंद्र सिंह धोनी के उभार के बाद रांची पर क्रिकेट का बुखार तेजी से चढ़ा है। शहर का क्रिकेट स्टेडियम स्थानीय युवाओं के लिए क्रिकेट का मक्का बन गया है।

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By Nandlal Sharma