रांची, जेएनएन: रांची स्थित दीपशिखा संस्थान तीन दशकों से शहर में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। इस संस्थान में ऑटिज्म, मानसिक दिव्यांगता, सेरेब्रल पॉल्सी और विभिन्न अंगों की दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चों के इलाज के अलावा उनकी शिक्षा-दीक्षा व सर्वांगीण विकास का इंतजाम किया जाता है। झारखंड के विभिन्न हिस्सों से बच्चे यहां संस्थान की विशेष सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। 

समय समय पर सेमिनार व जागरूकता के कार्यक्रम
संस्थान की ओर से समय समय पर विश्वविख्यात विशेषज्ञों को बुलाकर संस्थान ऑटिज्म, मानसिक दिव्यांगता, सेरेब्रल पॉल्सी समेत विभिन्न बीमारियों पर चर्चा और सेमिनार का आयोजन कराता है। इस माध्यम से इन बीमारियों का समाधान ढूंढने की कोशिश होती है। साथ ही इन बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की सही देखरेख का मार्ग प्रशस्त होता है। दिव्यांग बच्चों व युवाओं को विशेष क्षमता से युक्त बच्चों और युवाओं के रूप में पहचान दिलाना संस्थान का मकसद है।
खास तरीके से प्रशिक्षण
मानसिक दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चों को संस्थान खास तरीके से प्रशिक्षण देकर उनके लिए बराबरी का अवसर उपलब्ध कराने और सक्षम तथा हुनरमंद बनाने के लिए काम करता है। यहां इन बच्‍चों को छह महीने के शॉर्ट टर्म प्रशिक्षण देकर दिव्यांगजनों को कौशल विकास और कंप्यूटर तथा तकनीक से जुड़े अन्य प्रशिक्षण दिए जाते हैं।
यहां प्रशिक्षण पाकर दर्जनों दिव्यांग अच्छे संस्थानों में नौकरी कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि मिसाल भी कायम कर रहे हैं। यहां बड़े बच्चे-बच्चियों को दीया पेंटिंग, मार्बल पेंटिंग, कार्ड पेंटिंग, इंब्रॉयड्री, सिलाई आदि के रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं।
चलाए जाते हैं जागरूकता अभियान
संस्थान 1991 से रांची में काम कर रहा है। लगातार लोगों के बीच मानसिक दिव्यांगता को लेकर जागरूकता के भी कार्यक्रम संस्थान की ओर से चलाए जाते हैं। अबतक 10 हजार से अधिक बच्चों को संस्थान की ओर से सक्षम बनाया जा चुका है। संस्थान को शानदार काम के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं। शिक्षा, जागरूकता, स्वास्थ्य स्वच्छता की दिशा में संस्थान लगातार बेहतर काम कर रहा है।
(सुधा लिंडा दीपशिखा संस्थान की कार्यकारी निदेशक हैं)

By Krishan Kumar