रांची को नया रूप देने, लोगों में सेवा सहायता की भावना विकसित करने और जरूरतमंदों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राजधानी के छात्रों की टोली भी अहम भूमिका निभा रही है। यह टोली युवाओं को अपने समय का सदुपयोग नेक काम में करने के साथ साथ समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी से भी अवगत करा रही है। समाज को नई दिशा दे रहे ये छात्र रोट्रैक्ट क्लब ऑफ सेंट जेवियर कॉलेज के हैं। आज ये छात्र अन्य छात्रों के लिए भी मिसाल बने हैं।

सेंट जेवियर्स रांची में रोट्रैक्ट क्लब की शुरुआत पांच साल पहले हुई थी| रोट्रैक्ट क्लब के सदस्य उम्र 18 से 30 वर्ष के हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जागरूकता, नारी सशक्तीकरण और समाजसेवा के क्षेत्र में ये छात्र बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। चाहे छात्र-छात्राओं के बीच पठन-पाठन सामग्री वितरण का मामला हो, पौधरोपण का हो, रक्तदान का हो या जागरूकता का सबमें ये छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पांच साल पहले जब रोटरी क्लब ऑफ रांची ने सेंट जेवियर कॉलेज में प्राचार्य से बात कर यहां रोट्रैक्ट क्लब ऑफ सेंट जेवियर कॉलेज का गठन किया था, तब क्लब की गतिविधियां कॉलेज तक ही सीमित थीं, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ा और आज क्लब के सदस्य पूरे शहर में अपना अभियान चला रहे हैं। शिक्षा, मेडिसिन बैंक, पैड बैंक, उड़ान, पौधरोपण आदि अलग-अलग कार्यक्रमों और अभियानों के लिए क्लब की अलग-अलग शाखाएं काम कर रही हैं। कुल मिलाकर अभी 80 सदस्य क्लब में हैं, जबिक 17 बोर्ड मेंबर हैं। इसके अलावा कॉलेज के अन्य छात्र-छात्राओं का भी सहयोग रहता है। क्लब में मेटर सारस्वत चौधरी और डीएसडब्ल्यू मरकुस बारला समेत कुमारी मधु, शुभम कुमार सोनी, कुमारी संजना, असबा जावेद, गरिमा टोप्नो, अकरम अली समेत दर्जनों लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं। छात्रों को शिक्षकों का निरंतर सहयोग व मार्गदर्शन मिलता रहता है।

थड़पखना के दो स्कूलों को लिया है गोद
रांची के थड़पखना में स्थित दो स्कूलों को क्लब ने गोद लेकर वहां के छात्र-छात्राओं की दिक्कतें दूर करने का संकल्प लिया है। यहां छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन सामग्री से लेकर जरूरत के अन्य सामान उपलब्ध कराते हुए क्लब के सदस्य उन्हें जागरूक व जिम्मेदार बनाने की कोशिश करते हैं। स्कूल में विद्यार्थियों की सुविधाओं के सामान भी उपलब्ध कराए जाते हैं। यहां क्लब के छात्र जाकर निःशुल्क बच्चों को पढ़ाते भी हैं। सामान्य ज्ञान, संगीत, खेल आदि की भी शिक्षा दी जाती है।

लगातार आयोजित कराते हैं मोटिवेशनल कैंप
क्लब के छात्र कॉलेज में लगातार छात्र-छात्राओं के लिए मोटिवेशनल कैंप का भी आयोजन कराते रहते हैं। इसमें छात्रों को करियर, स्वास्थ्य, लाइफ मैनेजमेंट, मोरल रिस्पॉन्सिबिलिटी आदि को लेकर जानकारियां दी जाती हैं। डायबिटीज, हायपरटेंशन, डिप्रेशन आदि को लेकर जानकारियां भी दी जाती हैं और समाधान भी बताया जाता है। समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते हैं।

नारी सशक्तीकरण की दिशा में भी काम
क्लब के छात्रों की ओर से कॉलेज में हर साल फरवारी में उड़ान के नाम से छात्राओं को समर्पित एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में सफल महिलाओं, महिला अधिकारियों, प्रोफेशनल व सफल छात्राओं को बुलाकर मोटिवेशन स्पीच का आयोजन किया जाता है। इसमें छात्राओं को आगे बढ़ने, उत्साही बनने, संघर्ष व मोहनत करने, हौसला बुलंद रखने और खुद को कमजोर न समझने के लिए प्रेरित किया जाता है। सफल छात्राओं को सम्मानित भी किया जाता है। छात्राओं के स्वास्थ्य को लेकर भी कई अभियान शुरू किया गया है। पैड बैंक नाम से एक अभियान चलाकर सेनेट्री पैड का वितरण भी क्लब की छात्रा शाखा कर रही है।

मेडिसिन बैंक दे रहा सबको दवा
क्लब का मेडिसिन बैंक स्कूल-कॉलेजों व छात्र-छात्राओं के माध्यम से घूम-घूम कर वैसी दवाइयां इकट्ठा करता है जो इस्तेमाल करने की बजाय लोग फेंक देते हैं। ऐसे लोगों को प्रेरित किया जाता है कि बची दवाइयां, रखी दवाइयां व वर्तमान समय में उनके काम में न आ रही दवाइयों को मेडिसिन बैंक को दें ताकि ये दवाएं किसी जरूरतमंद के काम आ सके। बड़ी मात्रा में दवाइयां इकट्ठा हो जाने के बाद दवाएं अस्पतालों के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाती हैं।

पौधरोपण, स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता
क्लब के छात्र-छात्राओं द्वारा शहर भर में पौधरोपण और स्वास्थ्य शिविर के आयोजन किए जाते हैं। लोगों को जागरूक भी किया जाता है। कॉलेज कैंपस में भी क्लब के विद्यार्थी 'कीप योर कैंपस क्लीन' नाम से एक अभियान चलाते हैं। इसमें कैंपस को सब मिलकर साफ और स्वच्छ बनाते हैं। इसके बारे में एक-दूसरे को जानकारियां देकर जागरूक भी करते हैं।

दुख बांटने की कोशिश
समय-समय पर क्लब के छात्र वृद्धाश्रम, मूक-बधिर विद्यालय और अनाथालयों में जाकर वहां रहनेवाले लोगों का दुख-दर्द भी बांटते हैं। वहां जरूरत के कुछ सामान का वितरण भी किया जाता है। साथ ही नाटक, संगीत, डांस आदि के जरिए भी सबके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश होती है।

By Krishan Kumar