रांची/लोहरदगा, जेएनएन। CAA Support के जुलूस पर पथराव के बाद धू-धू कर जल उठे लोहरदगा में जहां हालात काबू में करने के लिए पूरे शहर में धारा 144 लागू किया गया है, वहीं शुक्रवार को कर्फ्यू  के बाद भी शहर में कई जगहों पर ह‍िंसक झड़प हुआ। शहर से सटे निंगनी गांव में पुलिस को जाने से रोका गया जिस पर पुलिस ने जमकर लाठियां चटकाईं। बल प्रयोग के कारण कई लोगों को चोटें आई हैं। कर्फ्यू के कारण शहर की सड़कों पर सन्‍नाटा पसरा है, घर से किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। डीसी आकांक्षा रंजन और पुलिस अधीक्षक प्रियदर्शी आलाेक के मुताबिक शांति व्यवस्था कायम करने को लेकर पुलिस-प्रशासन ने पूरा जोर लगा रखा है। जल्‍द ही हालात पर काबू पा लिया जाएगा।

इधर गुरुवार की हिंसक वारदात के बीच दो समुदायों में तनाव से निपटने के लिए लोहरदगा की सुरक्षा व्यवस्था अर्धसैनिक बलों के हवाले कर दी गई है। आयुक्‍त, डीआइजी के साथ डीसी-एसपी खुद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। रैफ, सीआरपीएफ, आईआरबी और जिला बल के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए हैं। पुलिस लगातार शहर में पेट्रोलिंग कर रही है। इधर लोहरदगा में हिंसा-बवाल के बाद यात्री रेलगाड़ी का परिचालन बंद रखा गया है। रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर यात्री रेलगाड़ी का परिचालन शुक्रवार को रद कर दिया।

लोहरदगा में उपद्रव की घटना ने सामाजिक सौहार्द को तार-तार कर दिया है। ऐसे में राज्य के आला अधिकारी भी लोहरदगा पर करीबी नजर रख रहे हैं। यहां पांच एसपी, 12 डीएसपी समेत 2000 जवानों की तैनाती की गई है। एहतियात के तौर पर रांची, खूंटी, बोकारो, गुमला, लातेहार, हजारीबाग, जमेशदपुर, सरायकेला से पुलिस बल को बुलाया गया है। इस बीच उपद्रव फैलाने के संदेह में दर्जनभर लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। लोहरदगा मेंं दो कैंप जेल शांति आश्रम विद्यालय और संत स्तानिस्लास विद्यालय में बनाए गए हैं, जहां उपद्रवियों को  हिरासत में लेने के बाद रखा जाएगा।

लोहरदगा में कर्फ्यू जारी, शांति बहाली की कोशिश

तिरंगा यात्रा के दौरान पथराव, आगजनी, हिंसा-बवाल की घटना के बाद लोहरदगा में लगा कर्फ्यू  शुक्रवार को जारी है। शांति बहाली की कोशिशें तेज हो चुकी है। सुरक्षा को लेकर शस्त्र जवानों को फ्लैग मार्च कराया जा रहा है। अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा को अलर्ट पर रखा गया है। एंबुलेंस, पुलिस के सायरन की गूंज सुनाई दे रही है। ग्रामीण इलाकों में लगातार अफवाह की हवा उड़ रही है। जिससे लोग सहमे हुए हैं। लोहरदगा में सोशल मीडिया के माध्यम से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, उसे लेकर लोग ज्यादा भयभीत हैं। 

शहर के बीच बड़ा तालाब में शव होने, शुक्रवार को भी घरों को फूंकने, दुकानों में लूटपाट होने की अफवाह काफी तेजी से फैल रही है। हालांकि इसमें कोई भी सच्चाई नजर नहीं आ रही। पुलिस की ओर से अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश लगातार जारी है। ग्रामीण इलाकों में लोग काफी भयभीत हैं। अलग-अलग समूह बनाकर खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। लोहरदगा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी संख्या में अर्धसैनिक बल के जवानों को लगाया गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं, जो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम नजर आ रहे हैं। सुरक्षा को लेकर जिले के सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिनियुक्त कर स्थिति को नियंत्रित करते हुए शांति बहाल कराने के लिए लगाया गया है।

ग्रामीण इलाकों में उड़ रही अफवाह की हवा, सहमे हुए हैं लोग

लोहरदगा में हालात इतने खराब हैं कि शहर में कहीं कोई दुकान खुली तक नहीं है। यही नहीं आम आदमी की बात कौन करे, यहां तो सुरक्षा बल के जवानों के लिए भी समूचित तरीके से खाना-पानी के लाले पड़ गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अधिकारियों और जवानों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था कराई गई है। बावजूद उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए भी भोजन की व्यवस्था नहीं थी। जिसके बाद स्वयंसेवी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त आकांक्षा रंजन से अनुरोध किया। उपायुक्त के निर्देश पर मरीजों के लिए फल, ब्रेड सहित अन्य खाद्य सामग्री मरीजों और उनके परिजनों के लिए उपलब्ध कराया गया।

लोहरदगा में हिंसा-बवाल के बाद शहर के बरवाटोली में तैनात तीन-तीन एसपी। बाएं से मनोज रतन चोथे, नौशाद आलम और सुजाता वीणापानी।

दुखद पहलू यह है कि सदर अस्पताल से रेफर करने वाले मरीजों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस भी समय पर नहीं मिल रहा था। कई के हालात इतने बदतर थे कि अस्पताल से छुट्टी होने पर उन्हें घर जाने के लिए भी कोई वाहन नहीं मिला। ऐसे में काफी संख्या में लोगों को पैदल ही अपने घर जाने पड़ा है। लोहरदगा रेलवे स्टेशन में भी सैकड़ों यात्री फंसे रहे हैं। रेल सेवा के बाधित होने से यात्रियों को गंतव्य तक जाने में काफी परेशानी हुई है। बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन, यात्री वाहन और निजी वाहन भी लोहरदगा जिला के बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। कई बाराती वाहनों को पुलिस अभिरक्षा में लोहरदगा शहरी क्षेत्र से पार कराया गया है। लोहरदगा के वर्तमान हालात से लोग खौफ में जीने को विवश हैं। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बीमार लोगों और दिहाड़ी मजदूरों के समक्ष है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए तो जैसे आफत आ गई है। उन्हें दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल रही है।

इससे पहले विहिप के आह्वान पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में लोहरदगा में गुरुवार को निकाले गए जुलूस पर अमला टोली में हमला-पथराव के बाद पूरे शहर में धारा 144 लगा दिया गया। यहां अचानक हुए पथराव से अफरातफरी मच गई और सैंकड़ों लोग बुरी तरह चोटिल हो गए। जो जहां था, अपनी जान बचाने के लिए वहीं छिप गया। हिंसा-बवाल की आग इतनी तेज थी कि देखते-देखते इसने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। सीएए के समर्थन में निकाली गई जुलूस पर पथराव करने वाले उपद्रवियों ने इस क्रम में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी भी की।

लोहरदगा शहर के अलग-अलग इलाकों में कई वाहनों को फूंक दिया गया, तो कई वाहनों को तोड़ा गया। मोटरसाइकिल, चौपहिया वाहनों, निजी एवं सरकारी वाहनों के साथ-साथ कई दुकानों को फूंक दिया गया। घरों में घुसकर आग लगाई गई है। शुक्रवार को यहां तनाव भरे हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षा के भारी बंदोबस्‍त किए गए हैं। चप्‍पे-चप्‍पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। रैपिड एक्‍शन फोर्स के साथ ही अर्धसैनिक बलों को भी शहर में शांति-व्‍यवस्‍था कायम करने के लिए लगाया गया है। लोहरदगा की डीसी आकांक्षा रंजन और एसपी प्रियदर्शी आलोक एक-एक इलाके में घूमकर सुरक्षा व्‍यवस्‍था का जायजा ले रहे हैं। आयुक्‍त और डीआइजी ने भी मुख्‍यालय में कैंप किया हुआ है।

जुलूस में शामिल 50 लोगों के साथ कई पुलिसकर्मी घायल, स्थिति तनावपूर्ण

कुछ देर के अंतराल पर पूरा लोहरदगा धू-धू कर जलने लगा। इन घटनाओं में चार दर्जन से अधिक महिला-पुरुषों के साथ पुलिस के भी कई जवान घायल हुए हैं। घायलों में सीएए समर्थकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हैं। शहर के कई इलाकों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई और प्रतिहिंसा का दौर भी शुरू हो गया। हिंसा रोकने में पुलिस पूरी तरह विफल रही, यहां तक कि उपद्रवियों ने एसपी प्रियदर्शी आलोक को लक्ष्य कर जबरदस्त पथराव किया। किसी तरह अंगरक्षक उन्हें सही सलामत निकालने में सफल रहे, लेकिन इस क्रम में एसपी के कई अंगरक्षक घायल हो गए।

शहर में लगाया गया कर्फ्यू 

शहर के माहौल को देखते हुए उपायुक्त आकांक्षा रंजन के निर्देश पर एसडीओ ज्योति कुमारी झा ने शहर में एहतियातन कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दी। इसके साथ अग्निशमन विभाग सहित तमाम आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट कर दिया गया है। लोगों को घर से नहीं निकलने की हिदायत दी गई है। 

ऐसे बढ़ा लोहरदगा में बवाल

सीएए के समर्थन में जुलूस जैसे ही अमलाटोली के पास पहुंची उपद्रवियों ने बवाल मचा दिया। जुलूस पर पथराव करने लगे। जुलूस के साथ चल रही पुलिस को भी निशाना बनाया गया, जिससे भगदड़ मच गई। जिसे जिधर जगह मिली, उधर ही भाग निकले। पुलिस उपद्रवियों को नियंत्रित करने में विफल रही। इसके बाद शहर के जामा मस्जिद चौक, बड़ा तालाब, सोमवार बाजार, बक्सीडीपा, पावरगंज चौक सहित कई स्थानों में वाहनों में तोडफ़ोड़, आगजनी, पथराव, हवाई फायरिंग हुई। कई दुकानों और घरों को लक्ष्य बनाकर तोडफ़ोड़ कर लूटपाट की गई। साथ ही आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया।

 

पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले छोड़ उपद्रवियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। बावजूद बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा। उपायुक्त आकांक्षा रंजन, एसपी प्रियदर्शी आलोक, डीडीसी आर रोनिटा, एसडीओ ज्योति कुमारी झा, एसडीपीओ जितेंद्र कुमार सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी सड़क पर उतरकर शांति व्यवस्था कायम करने में जुटे रहे।

इधर इस घटना के बाद पुलिस उपमहानिरीक्षक एबी होमकर लोहरदगा पहुंचकर स्थित पर नजर रख रहे हैं। लोहरदगा जिले के अलग-अलग स्थानों के अलावा दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल मंगा लिया गया है। सीआरपीएफ के जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर दिया गया।

स्कूल में फंसे रहे विद्यार्थी

इस दौरान कई स्कूलों में विद्यार्थी काफी देर तक फंसे रहे। बाद में पुलिस-प्रशासन के निर्देश पर बच्चों को सुरक्षित उनके घरों तक अभिभावकों के माध्यम से पहुंचाया गया। 

शहर में तनावपूर्ण स्थिति के लिए भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है। जब अन्य स्थानों पर लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं तो भड़काऊ नारेबाजी करते हुए लोगों को क्यों उकसाया गया। डॉ रामेश्वर उरांव, मंत्री, झारखंड सरकार।    

पूरी घटना को योजनाबद्ध रूप से अंजाम दिया गया है। जुलूस निकालने की सूचना पहले ही प्रशासन को देकर अनुमति ली गई थी। ऐसे में यदि पथराव, आगजनी, मारपीट की घटना हुई है तो इसके लिए जिम्मेवार लोगों को चिह्नित किया जाना चाहिए। डॉ सुमन, हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री।  

लोहरदगा में जो कुछ हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्थिति को लेकर काफी चिंता हो रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र बनाने की कोशिश की गई। सुदर्शन भगत, सांसद 

लोहरदगा की स्थिति से काफी तकलीफ होती है, हम सभी को आपसी सौहाद्र्र को बनाए रखना चाहिए। यह राजनीति करने का समय नहीं है, बल्कि सामाजिक स्थिति को सरल और शांत बनाने का है।  सुखदेव भगत, पूर्व विधायक। 

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