रांची [मुजतबा हैदर रिजवी]। राजधानी के धुर्वा में आनि में पंचमुखी मैदान में गरीबों के लिए बनने वाले फ्लैट जर्मन थ्री डी प्रिटिंग तकनीक से बनाए जाएंगे। यहां साढ़े 5 एकड़ क्षेत्रफल में 1008 फ्लैट के बनाने में फुली आटोमेटेड थ्री डी प्रिंटर मशीन का प्रयोग किया जाएगा। 3 डी तकनीक से ये लाइट हाउस नौ महीने के अंदर बन कर यार हो जाएंगे। इसके तहत, फ्लैट के सभी कमरे की दीवारों को फुली आटोमेटेड मशीन से प्रिंट किया जाएगा। इसके बाद सभी दीवारों और छतों को जोड़ दिया जाएगा।

लार्सन एंड टर्बो ने देश में बनाया था पहला 3डी प्रिंटर मकान

लार्सन एंड टर्बो में देश में कांचीपुरम में पहला 3डी इमारत का निर्माण किया था इस इमारत के निर्माण में कंक्रीट मिक्सचर का इस्तेमाल किया गया था कंपनी ने रेगुलर कंस्ट्रक्शन मैटेरियल से ही इसे विकसित किया है मकान में होरिजेंटल स्लैप्स को छोड़कर पूरी बिल्डिंग 3डी प्रिंटिंग तकनीक से बनाई गई इसमें फुली ऑटोमेटिक 3डी प्रिंटर का इस्तेमाल हुआ था इस मकान को बनाने में 106 घंटे लगे थे।

क्या है थ्री डी तकनीक

थ्री डी तकनीक से इमारत बनाने में थ्री डाइमेंशनल प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इसके लिए मैटेरियल को कंप्यूटर कंट्रोल के तहत लेयर बाय लेयर प्रिंट किया जाता है। इस तकनीक में प्लास्टिक समेत अन्य चीजों का प्रयोग किया जाता है। भारत में लार्सन ने जो इमारत बनाई थी उसमें कंक्रीट का भी इस्तेमाल हुआ है। इसका साफ्टवेयर जर्मनी ने तैयार किया है। सबसे पहले जर्मनी में थ्री डी प्रिंटिंग के जरिए 3 डी बिल्डिंग का निर्माण हुआ था।

6.79 लाख रुपये में मिलेंगे लाइट हाउस

एक फ्लैट के लिए लाभुक को छह लाख 79 हजार रुपये देने होंगे। एक फ्लैट की लागत 13 लाख 29 हजार रुपये आ रही है।छह लाख 50 हजार रुपये सरकार सब्सिडी देगी। लाइट हाउस में जी प्लस आठ के अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। इनमें नौ ब्लाक बनेंगे। सभी ब्लाक में एक लिफ्ट भी होगी। एक फ्लैट 315 वर्ग फीट रकबे में होगा। इसमें एक बेडरूम, एक लिविंग रूम, एक किचन, एक बाथरूम, एक बालकोनी और एक शौचालय होगा। साथ ही एक पार्किंग होगी और लाइट हाउस के लिए अलग से एक कम्यूनिटी हाल भी बनाया जाएगा।

लाइट हाउस के फ्लैट हासिल करने के लिए वो लोग पात्र हैं जो रांची नगर निगम क्षेत्र में जून 2015 से पहले से रह रहे हैं। इसके लिए रांची नगर निगम के काउंटर पर आवेदन लिए जा रहे हैं।

थिएटर की तकनीक से यह होंगे फायद

--इस तकनीक से बने मकान मजबूत और गुणवत्ता में अच्छे होते हैं।

-- - 3 डी तरीके से एक मकान तीन दिन के अंदर तैयार हो जाता है।

-- -- दो मंजिला इमारत बनाने में चार दिन का समय लगता है।

-- -इसमें मजदूर लगाने के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी।

-- - एक इंजीनियर ही 3डी प्रिंटर मशीन चला कर एक अपार्टमेंट की सामग्री तैयार कर देगा

-- -- इस तकनीक से इमारत की लागत 25 फीसद तक कम हो जाएगी

-- -- इको फ्रेंडली माहौल में इमारत का निर्माण होगा और धूल नहीं उड़ेगी

-- -- 3 डी तरीके से बने मकान भूकंप रोधी होंगे

Edited By: Vikram Giri