16 साल पहले दैनिक जागरण की नींव भगवान बिरसा मुंडा की धरती झारखंड में पड़ी थी। 12 फरवरी 2003 को एक साथ रांची, जमशेदपुर और धनबाद यूनिट का शुभारंभ हुआ। देश के इस सबसे बड़े अखबार और खबरों के सर्वाधिक विश्वसनीय स्त्रोत दैनिक जागरण से 13 फरवरी को झारखंडवासी रूबरू हुए। तब से शहर हो या सुदूर गांव, बिना लागलपेट के तटस्थ खबरों के साथ हमने आप सरीखे पाठकों के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई।

जब हमने यहां कदम रखा तो दो साल पहले ही झारखंड का भी उदय हुआ था। बिहार से अलग होकर यह राज्य अपने विकास की नई गाथा लिखने को उत्सुक था। आकांक्षाएं उबाल ले रही थीं। झारखंड से उन्हें नई पहचान जो मिली थी। लोगों की उम्मीद थी कि बिहार से अलग होकर झारखंड विकास की पटरी पर सरपट दौड़ेगा लेकिन उम्मीदें परवान नहीं चढ़ पाईं। शुरूआती सालों में ही झारखंड लूटखंड, भ्रष्टाचार, राजनीतिक उठापटक सरीखी बदनामी का कलंक अपने माथे पर ले बैठा।

इसकी एक बड़ी वजह थी राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और कुछ कर गुजरने की प्रबल इच्छाशक्ति का अभाव। 2014 के विधानसभा चुनाव में पहली बार राज्य की जनता ने राजग को बहुमत दिया तो हालात बदलने लगे हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस, विकास दर, कृषि क्षेत्र में राज्य ने हाल के दिनों में बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो गई है। विकास दिखने लगा है, फिर से उम्मीदों की लहर उफान मारने लगी है। इस बदलते झारखंड का दैनिक जागरण हर पल साक्षी रहा है।

खीचेंगे विकास का रोड मैप

कोई शक नहीं कि हालात बदले हैं लेकिन मंजिल अभी भी काफी दूर है। इसे पाने का क्या रोड मैप होगा? किस क्षेत्र में क्या हुआ, आगे हम कैसे और बेहतर करें? झारखंड में 16 साल पूरा कर चुका दैनिक जागरण अगले 16 दिनों तक झारखंड के विकास का ऐसा ही रोड मैप खींचेगा। अतीत में झांककर हम उन बेहतर योजनाओं की पड़ताल करेंगे जो राजनीति और लापरवाह नौकरशाही की भेंट चढ़ गए। एक्सपर्ट, क्षेत्र के विशेषज्ञों, इन्हें अमल में लाने वाले जिम्मेदार लोगों से पूछेंगे कि क्यों ऐसा हुआ।

यह जानने की कोशिश करेंगे कि अगर ये योजनाएं लागू होतीं तो विकास की दौड़ में हम कहां होते। जो योजनाएं बंद हो गईं उसके मुकाबिल आज क्या हो रहा। आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, सामाजिक सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाएं, निवेश आदि क्षेत्रों की 16 योजनाओं की पड़ताल होगी। अपने स्थापना दिवस 13 फरवरी से लेकर अगले 16 दिन तक अखबार के माध्यम से इन योजनाओं से जुड़े सवाल होंगे।

उन चुनौतियों की भी चर्चा करेंगे जो हमारे सामने खड़े हैं। बेशक झारखंड में माद्दा है सबसे आगे निकलने का, बस मिलकर जोर लगाने की देरी है। इस दौरान हमें आपकी सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता होगी। आप हमें अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएं। हमारी कोशिश होगी कि इस मंथन का फलाफल निकले और युवा झारखंड विकसित राज्यों के समकक्ष चहलकदमी करे।

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