SIR 2026: अनाथ; ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स के लिए आसान हुए नियम, बिना कागजात भी बनेगा वोटर आईडी
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अनाथों, ट्रांसजेंडरों, सेक्स वर्कर्स और निराश्रित महिलाओं के लिए वोटर आईडी बनाने के नियम आसान किए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के निर्देश पर अब वैकल्पिक दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के आधार पर भी इन वंचित वर्गों को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
HighLights
वैकल्पिक दस्तावेजों या भौतिक सत्यापन से बनेगा पहचान पत्र।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने वंचितों को शामिल करने के दिए निर्देश।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत राज्य के अनाथों, ट्रांसजेंडरों, सेक्स वर्कर्स, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों को मतदाता बनाने के लिए विशेष राहत दी गई है।
आवश्यक दस्तावेज न होने की स्थिति में उनके लिए वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता प्रदान की गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है।
उन्होंने कहा कि नोटिस सुनवाई के दौरान कमजोर, बीमार, दिव्यांग और वंचित वर्गों के पात्र भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता और सहयोग दिया जाए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, अनाथालयों या आश्रय गृहों में रहने वाले व्यक्तियों के पास मानक पहचान पत्र न होने पर संबंधित संस्था द्वारा जारी प्रमाण पत्र और जिले के सहायक निदेशक (सामाजिक सुरक्षा) द्वारा अभिप्रमाणित घोषणा पत्र मान्य होगा।
इसके लिए निर्धारित प्रारूप का उपयोग कर नागरिकता और निवास का सत्यापन किया जाएगा। सेक्स वर्कर्स के पास यदि सामान्य निवास का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, तो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके पते पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे कि संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 में दर्ज पते पर रह रहा है या नहीं।
संबंधित विभागों और नागरिक संस्थाओं के सहयोग से ऐसे सभी पात्र व्यक्तियों को मतदाता सूची में शामिल कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
वृद्धाश्रमों में रह रहे वरिष्ठ नागरिक जिस क्षेत्र के वृद्धाश्रम में सामान्य रूप से निवास कर रहे हैं, उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा, बशर्ते वे अन्य आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।
ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नए नामांकन और सत्यापन के लिए विशेष ढील दी गई है। प्रमाण पत्र न होने की स्थिति में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) रूल्स, 2020 के तहत जारी पहचान पत्र या निर्धारित घोषणा पत्र के आधार पर मतदाता पहचान पत्र बनाया जाएगा।
जिला समाज कल्याण अधिकारी उन्हें कागजात जुटाने में मदद करेंगे। वहीं शक्ति सदन में रह रही निराश्रित महिलाओं को भी संस्था और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के माध्यम से आवश्यक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग की मंशा है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक, चाहे वह समाज के अंतिम पायदान पर ही क्यों न हो, मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।
