Jharkhand Sthaniya Niti: मधु कोड़ा के बुरे दिन, हेमंत का मिलने से इन्कार, पत्र भेजकर रखी मन की बात
Jharkhand Sthaniya Niti झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने 1932 का खतियान आधारित फैसला रद करने की मांग की है। इसकी जगह वह खतियान आधारित स्थानीयता नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही ग्रामसभा के अधिकार और कर्तव्यों को भी नोटिफाई करने की मांग की है।

रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Sthaniya Niti निर्दलीय विधायक रहते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री बनने का विश्व रिकार्ड कायम करने वाले मधु कोड़ा के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। अब उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उनसे मिलने से कतरा रहे हैं। खबर है कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलना चाहते थे। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मिलने से ही इन्कार कर दिया।
पत्र लिखकर हेमंत सोरेन को भावना से कराया अवगत
बताया जा रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा झारखंड में 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाए जाने के फैसले से नाराज हैं। वह नहीं चाहते कि झारखंड में 1932 का खतियान अनिवार्य किया जाए। उन्हें डर है कि बहुत सारे लोग इस कारण झारखंड की नागरिकता खो देंगे। इसी सिलसिले में वह अपनी आपत्तियों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखना चाह रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री से मिलने का मौका नहीं मिला। अंतत: मधु कोड़ा ने एक पत्र में अपनी मन की बात लिखकर हेमंत सोरेन को अवगत कराया है।
1932 का खतियान मानने से कई लोग बाहरी हो जाएंगे
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का तर्क है कि 1932 के आधार वर्ष को संशोधित करते हुए खतियान आधारित स्थानीयता नीति बनाई जाए। इसके अलावा उन्होंने ग्रामसभाओं को मिले अधिकार, जिम्मेदारी और कर्तव्यों को स्पष्ट करते हुए उसे संवैधानिक रूप से नोटिफाई करने का आग्रह किया है। अपने पत्र में मधु कोड़ा ने लिखा है कि स्थानीयता को परिभाषित करते हुए जो प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है, उसमें इसका जिक्र है कि जो झारखंड की भौगोलिक सीमा में निवास करता हो या स्वयं अथवा उसके पूर्वज का नाम 1932 अथवा उसके पूर्व के सर्वे खतियान में दर्ज हो। भूमिहीन के मामले में यह पहचान संबंधित ग्रामसभा द्वारा की जाएगी। यह राज्य में प्रचलित भाषा, रहन-सहन, वेशभूषा, संस्कृति और परंपरा आधारित होगी। प्रस्ताव में वर्णित स्थानीयता का प्रविधान मान लेने से कोल्हान प्रमंडल के जिलों में निवास करने वाले लोग स्थानीय की परिधि से बाहर हो जाएंगे।
केवल खतियान आधारित स्थानीयता लागू करे सरकार
पूर्व सीएम मधु कोड़ा के अनुसार, झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में ताजा सर्वे सेटलमेंट वर्ष 1934, वर्ष 1958 एवं वर्ष 1964-65 और वर्ष 1970-72 में हुआ है। ऐसे में इसे ध्यान में रखते हुए खतियान आधारित वर्ष 1932 को विलोपित कर केवल खतियान आधारित स्थानीयता को लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा ग्रामसभाओं के अधिकारों को भी स्पष्ट तरीके से परिभाषित करने की जरूरत है।
मधु कोड़ा व गीता कोड़ा कर रहे हेमंत का विरोध
मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पहले की तुलना में अब राजनीति में कम सक्रिय नजर आते हैं। उनके खिलाफ कई तरह के मामले भी चल रहे हैं। वैसे पिछली बार विधानसभा चुनाव के समय उनकी सक्रियता जरूर दिखी थी। उनके कहने पर उनके ही खासमखास को कांग्रेस ने टिकट भी दिया था। उनकी सक्रियता से प्रत्याशी की जीत भी हुई थी। फिलहाल उनकी पत्नी गीता कोड़ा चाईबासा लोकसभा क्षेत्र की सांसद हैं। वह कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गई हैं। इतना ही नहीं वह प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। पिछले दिनों गीता कोड़ा ने भी टवीट कर हेमंत सोरेन के 1932 खतियान को गलत ठहराया था। इसे रद करने की मांग की थी। मधु कोड़ा और गीता कोड़ा पहले ऐसे कांग्रेसी हैं, जिन्होंने हेमंत के इस कदम का विराेध किया है। वैसे इस मुद्दे पर पूरी कांग्रेस हेमंत के साथ खड़ी है।
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