रांची, राब्यू । राज्य के सभी 11 मंत्रियों के लिए स्मार्ट सिटी में बंगला निर्माण को लेकर 69.9 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। साढ़े छह करोड़ की लागत से हर मंत्री के लिए 1.42 लाख वर्ग फीट में आलीशान बंगला बनेगा। तमाम अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से परिपूर्ण इन बंगलों में टेबल टेनिस, बिलियड्र्स एवं बैडमिंटन कोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। मंत्री और उनके कर्मियों के रहने का भी बंगले में अलग-अलग प्रबंध रहेगा। दो फ्लोर के भवन में मास्टर बेड रूम, पूजा रूम, गेस्ट रूम, फैमिली लांज, काफी लांज आदि सुविधाएं होंगी। किचेन, मेस, जिम, योग करने के लिए जगह, गार्ड के रहने के लिए नौ बेड की डोरमेट्री, 15 बेड की दो डोरमेट्री और छह बेड की एक डोरमेट्री का प्रबंध होगा। बंगले में मंत्री का अपना कार्यालय भी होगा और यह आवास परिसर से अलग भी रहेगा। मंत्रियों के सभी बंगले दस एकड़ में बनेंगे, निर्माण को दो साल में पूरा करने की मियाद तय की गई है।

गुरुवार को कैबिनेट ने इसके साथ ही कुल 17 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। पश्चिम सिंहभूम में सरकारी उपक्रमों के लिए आरक्षित रखे गए सात लौह अयस्क खदानों के फैसले को कैबिनेट ने वापस ले लिया है। कैबिनेट ने झारखंड सचिवालय सेवा नियमावली और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला सेवा नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन दोनों सेवाओं के लिए झारखंड से मैट्रिक और इंटर पास अभ्यर्थियों को जिन्हें स्थानीय भाषा को व्यावहारिक ज्ञान हो, को ही नौकरी मिल सकेगी।

200 क्विंटल से अधिक धान नहीं बेच सकेंगे किसान

राज्य में धान अधिप्राप्ति के लिए पुरानी दरों के आधार पर आठ लाख एमटी धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों से अधिप्राप्ति की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी है। अब कोई भी किसान राज्य में 200 क्विंटल से अधिक धान सरकारी एजेंसियों को बेच नहीं सकेगा। धान अधिप्राप्ति के लिए किसान 15 नवंबर 2021 से 15 जनवरी 2022 तक आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए पिछली बार की तरह 2050 और 2070 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित है।

कैबिनेट ने पलटा लौह अयस्क खदान पर अपना पुराना फैसला

राज्य कैबिनेट ने 18 अगस्त 2020 की बैठक में निर्णय लिया था कि प. सिंहभूम में सात लौह अयस्क खदान झारखंड के सरकारी उपक्रमों के लिए आरक्षित रहेंगे। यह फैसला केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद पलट लिया गया है। केंद्र सरकार ने फरवरी 2021 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर आक्शन के लिए तैयार खदानों को अधिसूचित करने को कहा था। इसके लिए पूर्व में आरक्षित रखे गए खदानों को फ्री करना अनिवार्य हो गया था। गुरुवार की बैठक में कैबिनेट ने पुराने फैसले को वापस लेते हुए तय किया है कि लौह अयस्क खदानों के लिए खुली बोली के आधार पर खनन का कार्य आवंटित किया जाएगा। अगर बोली लगाने वाली कंपनी खनन कार्य करने में असफल रहती है तब जाकर राज्य सरकार अपने उपक्रमों के लिए इन खदानों को आरक्षित रख सकती है।

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इन खनन पट्टों को आरक्षित करने का लिया गया था फैसला

मेसर्स शाह ब्रदर्स, करमपदा, - 89 हेक्टेयर

रूंगटा माइंस लिमिटेड, घाटकुरी, - 85 हेक्टेयर

रामेश्वर जूट मिल्स, बराईबुरू, -99 हेक्टेयर

निर्मल कुमार-प्रदीप कुमार, घाटकुरी, -74 हेक्टेयर

पदम कुमार जैन, ठाकुरानी मौजा, -68 हेक्टेयर

मिश्री लाल जैन एंड संस, करमपदा, - 35 हेक्टेयर

आर मैक्लिड एंड कंपनी, करमपदा, - 08 हेक्टेयर

कैबिनेट के अन्य फैसले ::

- झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रांची कार्यालय में संविदा पर नियुक्त एक कर्मी की सेवा नियमितीकरण की स्वीकृति।

- वामपंथी उग्रवादियों के प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास नीति में आंशिक संशोधन की स्वीकृति दी गई। नई व्यवस्था में समर्पण करनेवाले उग्रवादी और स्क्रीनिंग कमेटी की अनुशंसा पर ऐसे लोगों को ओपन जेल में रखा जा सकेगा।

- राज्य योजना अंतर्गत स्वस्थ हो चुके मानसिक दिव्यांग जनों के पुनर्वास एवं देखभाल के लिए हॉफ-वे होम्स के संचालन की स्वीकृति दी गई। ऐसे आवासों में 30-30 लोगों को रखा जा सकेगा और फिलहाल रांची, धनबाद और पू. सिंहभूम में ऐसे केंद्रों के संचालन की स्वीकृति।

- बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित तृतीय स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफल वरीय अंकेक्षक-2 को प्रथम योगदान की तिथि से वेतनमान अनुमान्यता की स्वीकृति।

- राज्य के 7 जिलों यथा-रांची सदर, जमशेदपुर सदर, बोकारो, देवघर, चाईबासा, गुमला एवं गोड्डा में कोविड-19 की जांच हेतु विशेष प्रयोगशाला स्थापित करने तथा रिम्स, रांची में 110 बेड की आइसीयू इकाई हेतु प्रेझा फाउंडेशन को मनोनयन के आधार पर कार्य आवंटित किया गया है। फाउंडेशन एवं झारखंड स्टेट मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड नामकुम, रांची के साथ किए जाने वाले एमओयू हेतु एमओयू प्रारूप पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।

- गैर-सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों को व्यवहार में नहीं लगाए गए उपार्जित अवकाश के समतुल्य नगद राशि के भुगतान की शर्तों में संशोधन की स्वीकृति दी गई। पूर्व में जहां 31 जनवरी 2014 को कट ऑफ डेट माना गया था, वहीं अब अलग राज्य बनने के बाद से सेवानिवृत्त कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा।

- झारखंड के 20 जिलों में कुल 24 अधीनस्थ न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए 52 करोड़ 43 लाख 32 हजार रुपये व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की योजना ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एक्सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत वल्र्ड ट्रेड सेंटर की स्थापना रांची में किए जाने एवं राज्यांश के रूप में 27 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।

- वितरण इकाई के अंतर्गत विश्व बैंक संपोषित जेपीएसआइपी योजना हेतु झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को विमुक्त राशि रु. 26.57 करोड़ को हिस्सा पूंजी में परिवर्तित करने की स्वीकृति दी गई।

- देवघर जिला में करौं एवं मारगोमुंडा प्रखंड स्तरीय स्टेडियम निर्माण हेतु क्रमश: 86.04 लाख और 1.34 करोड़ रुपये की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

- सीटी एमआइएस योजना के तहत काम कर रही परामर्शी टीसीएस को छह माह का अवधि विस्तार और उसपर होने वाले व्यय एक करोड़ 77 लाख रुपये (कर सहित) की स्वीकृति।

Edited By: Kanchan Singh