करम पर्व तो बहाना है, वास्तव में कुड़मी को रिझाना है...आजसू और जेकेएलएम के बीच सियासी खींचतान तेज
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में हुए करम महोत्सव के बाद झारखंड की कुड़मी राजनीति गरमा गई है, जहां आजसू और ...और पढ़ें

कुड़मी को आदिवासी दर्जा दिलाने के वादों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
HighLights
पुरुलिया करम महोत्सव से झारखंड की कुड़मी राजनीति में गरमाहट।
सुदेश महतो और जयराम महतो के बीच सियासी खींचतान तेज।
कुड़माली भाषा और आदिवासी दर्जे पर राजनीतिक वादे।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। वृहद झारखंड के दायरे में आने वाले पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिला पुरूलिया में दो दिन पहले हुए करम महोत्सव के बाद झारखंड की कुड़मी राजनीति में गरमाहट है। नवंबर 2000 में झारखंड बनने के बाद कुड़मी राजनीति में गहरी दखल रखने वाली आजसू पार्टी और उसके मुखिया सुदेश महतो का सीना फिर चौड़ा दिख रहा है।
आजसू पार्टी की कुड़मी सियासत में बड़ी हिस्सेदारी पा चुके जेकेएलएम अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम महतो भी खामोश नहीं है। सुदेश हो या जयराम, एक दूसरे की घेराबंदी की कवायद तेज है।
दरअसल, 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार अकेले चुनाव मैदान में उतरी जेकेएलएम पार्टी ने पूरे झारखंड में एनडीए गठबंधन में शामिल भाजपा और आजसू पार्टी का खेल बिगाड़ दिया। सूबे के दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां कुड़मी मतदाता जीत और हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं।
जयराम महतो की जेकेएलएम पार्टी अधिकतर सीटों पर तीसरे स्थान पर रही। मगर इतना मत पाने में जरूर कायमाब हुई कि अधिकतर विधानसभा सीटों पर एनडीए का काम बिगड़ गया। झामुमो की अगुवाई वाले यूपीए का झंडा लहर गया। सिल्ली से खुद सुदेश महतो हार गए।
बंगाल के सीएम ने झारखंड के उभरते नेता का किया जिक्र
करम महोत्सव का आयोजन स्थल बंगाल का पुरूलिया था। मुख्य अतिथि बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी थे। हां, शुभेंदु अधिकारी बोल गए कि झारखंड के एक उभरते नेता कह रहे हैं कि इसके पीछे भाजपा है, उसने फंडिंग की है। उन्होंने उभरते नेता की आलोचना की। दरअसल, जयराम महतो ने कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा था कि इसके पीछे भाजपा है।
लाखों लोगों की मौजूदगी में बंगाल के मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर झारखंड के किसी नेता का उल्लेख किए हैं तो झारखंडी सियासत में इसका असर पड़ना है। पड़ा भी। गरमाहट इसलिए भी बढ़ी है कि करम महोत्सव के ठीक पहले आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो ने दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
अंदाजा लगाया जा रहा था कि बंगाल के सीएम कुड़मियों के लिए बड़ी घोषणा जरूर करेंगे। उन्होंने किया भी। वायदा कि कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जल्द शामिल कराया जाएगा।
कुड़मी को आदिवासी का दर्जा दिलाएं
दो दशक तक सुदेश महतो समाज के अगुवा थे। अब युवाओं को मौका मिलना चाहिए। सूचनाधिकार के तहत देखना चाहिए कि उन्होंने झारखंड विधानसभा में कुड़मी समाज के लिए क्या बात की है? कितनी बार उनका मामला उठाया है? जहां तक कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की बात है तो यह वायदा बंगाल चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। यह होना भी चाहिए। दिल्ली में बहुमत है। केंद्र का मसला है। उन लोगों को कुड़मी को आदिवासी का दर्जा भी दिलाना चाहिए।
-जयराम महतो, विधायक सह अध्यक्ष, जेकेएलएम
कुड़माली भाषा को संवैधानिक अधिकार मिलेगा
किसी भी मनुष्य के लिए मातृभाषा का स्थान वही है जो उसकी माता का होता है। भरोसा मिला है कि कुड़माली भाषा को संवैधानिक दर्जा दिया जाएगा। कुड़माली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाता है तो भावी पीढ़ी के लिए नया रास्ता खुलेगा। समाज के और भी मसले हैं जिसके लिए सतत संघर्ष हो रहा है। उचित मंच पर लगातार संवाद किया जा रहा है। फलाफल बढ़िया होगा।
-सुदेश महतो, अध्यक्ष, आजसू पार्टी
झारखंड बनने के बाद कुड़मी को भूल गए
मैं वृहद झारखंड के लिए आंदोलन में शामिल रहा हूं। वृहद नहीं, सिर्फ झारखंड बना। झारखंड आंदोलन के घोषणापत्र में था कि कुड़मी को आदिवासी में शामिल किया जाएगा। यकीन न हो तो दस्तावेज दिखा देंगे। यह बात भूल गए। झारखंड विधानसभा में रामचंद्र सहिस और लंबोदर महतो ने कुड़मी को आदिवासी बनाने का मसला उठाया था। जो जवाब मिला, वो सुन लिए हैं। बंगाल में हम लोगों ने दस साल तक ममता दीदी का साथ दिया। कुछ नहीं हुआ। अब भाजपा पर भरोसा किए हैं। उन्होने वायदा तो किया है। देखते हैं।
-अजीत महतो, प्रधान, आदिवासी कुड़मी समाज सह करम आयोजक
झारखंड की इन सीटों पर कुड़मी का प्रभाव
डुमरी, सिल्ली, ईंचागढ़, जुगसलाई, बहरागोड़ा, चक्रधरपुर, चंदनकियारी, सिंदरी, टुंडी, गोमिया, बेरमो, रामगढ़, मांडू, खरसावां, तमाड़, बड़कागांव, सरायकेला, कांके, खिजरी, बगोदर, महागामा, बोकारो, बाघमारा समेत एक दर्जन विधानसभा क्षेत्र में भी आबादी।
यह भी पढ़ें- बंगाल में करम महोत्सव, झारखंड के कुड़मी समाज में खदबदाहट; एसटी दर्जे की मांग फिर तेज
