बंगाल में करम महोत्सव, झारखंड के कुड़मी समाज में खदबदाहट; एसटी दर्जे की मांग फिर तेज
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में आयोजित विशाल करम महोत्सव में कुड़मी समाज के लोग बड़ी संख्या में जुटे, जहां बंगाल ...और पढ़ें

कुड़मी समाज लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहा।
HighLights
पुरुलिया में विशाल कुड़मी करम महोत्सव का आयोजन हुआ।
बंगाल सीएम ने कुड़माली को आठवीं अनुसूची में लाने का वादा किया।
झारखंड के कुड़मी समाज में एसटी दर्जे की मांग तेज।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड से महज 15 किमी की दूरी पर पश्चिम बंगाल के पुरूलिया के कोड़ाडीह में आदिवासी कुड़मी समाज ने करम महोत्सव मनाया। दावा किया गया कि इसमें बंगाल, झारखंड और ओडिशा के कुड़मी शामिल हुए।
कोई एक लाख लोगों के आने का दावा किया तो कोई तीन लाख। दावा चाहे जो हो, इतना जरूर है कि सालों बाद कोई ऐसा आयोजन हुआ जिसमें इतनी बड़ी संख्या में कुड़मियों ने शिरकत की है। करम महोत्सव में बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी बतौर मुख्य अतिथि आए।
वायदा किया कि बंगाल में कुड़मी आंदोलन में जो भी मुकदमे हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। निकट भविष्य में कुड़मियों की बोली कुड़माली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराया जाएगा। उन्होंने कुड़मी संस्कृति, बोली, जीवनशैली, पर्व त्योहार के संरक्षण के लिए पुरूलिया में सरकार के स्तर पर बड़ा कार्य किए जाने की भी घोषणा की।
बंगाल में इतना कुछ हुआ तो झारखंड के कुड़मी समाज में भी खदबदाहट बढ़ गई है। कुड़मी के सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग बंगाल में हुए आयोजन पर दावा और प्रतिदावा कर रहे हैं तो कुड़मी राजनेता भी हरकत में हैं।
दरअसल, झारखंड बनने के बाद अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने के लिए कुड़मी लगातार आवाज उठाते रहे हैं। कभी पर्व त्योहार के जरिए कुड़मी अपनी एकता दिखाते रहे हैं तो कभी रेल और सड़क जाम जैसे आंदोलन के जरिए सरकार को अपनी मांग बताते रहे हैं।
झारखंड के पिछले विधानसभा चुनाव के बाद कुड़मी समुदाय के भीतर शांति रही। अचानक आदिवासी कुड़मी समाज के अध्यक्ष अजीत महतो ने बंगाल के पुरूलिया में करम महोत्सव के आयोजन की घोषणा की। इसका गहरा असर झारखंड के कुड़मी समाज पर भी पड़ा है।
आजसू प्रमुख सुदेश महतो, भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्व विधायक लंबोदर महतो समेत झारखंड के कई चर्चित चेहरों को पुरूलिया में मंच पर जगह मिली। पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो को भी आमंत्रण मिला। वे नहीं जा सके।
डुमरी विधायक जयराम महतो, शीतल ओहदार, आस्तिक महतो, ललित महतो जैसे कई चेहरे पुरूलिया में नहीं दिखे। अलबत्ता, उन लोगों ने सार्वजनिक तौर पर पुरूलिया के कार्यक्रम का विरोध नहीं किया। जयराम महतो ने यह जरूर कहा कि इस आयोजन के पीछे भाजपा है।
जयराम ने लिखा, सीएम सुभेंदु को जवाब दिया जाएगा
पुरूलिया के करम महोत्सव में बंगाल के मुख्यंमत्री सुभेंदू अधिकारी ने नाम लिए बगैर कहा था कि झारखंड में एक नेता कहते फिर रहे हैं कि इस आयोजन के पीछे भाजपा है। हकीकत है कि भाजपा ने इसके लिए एक रूपया नहीं दिया। यहां लोग खुद आए हैं।
डुमरी विधायक जयराम महतो को लगता है कि सुभेंदु अधिकारी का इशारा उनकी ओर था। कारण कि उन्होंने कहा था कि इस आयोजन के पीछे भाजपा है। अब जयराम महतो ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा है कि कोई सांसद या विधायक टिप्पणी करते तो वे कुछ नहीं कहते। सीएम बोले हैं तो उन्हें जरूर जवाब मिलेगा। इंतजार कीजिए।
