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सामान्य कैडर में शामिल नहीं होंगे स्पेशल ब्रांच के दारोगा, झारखंड हाई कोर्ट का फैसला

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:45 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने स्पेशल ब्रांच के दारोगाओं को सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग खारिज कर दी ...और पढ़ें

कहा- एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता।

कहा- एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता।

HighLights

  1. स्पेशल ब्रांच दारोगा सामान्य पुलिस कैडर में नहीं होंगे।

  2. हाई कोर्ट ने भर्ती विज्ञापन में त्रुटि को चूक माना।

  3. अभ्यर्थी गृह विभाग में अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य पुलिस की स्पेशल ब्रांच में नियुक्त दारोगा को सामान्य पुलिस कैडर में शामिल करने की मांग पर फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्पेशल ब्रांच और जिला पुलिस के लिए एक ही प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से दोनों का कैडर एक नहीं हो जाता।

स्पेशल ब्रांच के पदों को सामान्य कैडर के पदों में बदलने का निर्देश भी नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि भर्ती विज्ञापन में स्पेशल ब्रांच के पदों के क्लोज्ड कैडर होने की स्पष्ट जानकारी नहीं देना विभागीय चूक थी। इस मामले में अदालत ने 174 अभ्यर्थियों की याचिकाओं का निष्पादन करते हुए याचिकाकर्ताओं को गृह विभाग के सक्षम प्राधिकार के समक्ष अभ्यावेदन देने की छूट दी है।

अदालत ने कहा कि अभ्यर्थी आदेश अपलोड होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत अभ्यावेदन दे सकते हैं। सक्षम प्राधिकार को अभ्यावेदन प्राप्त होने के 12 सप्ताह के भीतर नियमानुसार कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।

मामला जेएसएससी की ओर से आयोजित संयुक्त पुलिस अवर निरीक्षक प्रतियोगिता परीक्षा-2017 से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। उन्होंने अपनी प्राथमिकता में स्पेशल ब्रांच को चुना और सफल होने के बाद वर्ष 2018 में दारोगा के पद पर नियुक्त हुए।

अभ्यर्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि भर्ती विज्ञापन में स्पेशल ब्रांच के पदों को क्लोज्ड कैडर का हिस्सा होने की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्हें इस प्रतिबंध की जानकारी हुई। उनका कहना था कि क्लोज्ड कैडर में रहने से स्थानांतरण, पदोन्नति और भविष्य की सेवा संबंधी संभावनाओं पर असर पड़ता है।

राज्य सरकार ने कहा कि स्पेशल ब्रांच का अलग क्लोज्ड कैडर वर्ष 2009 में ही गठित किया गया था। अलग कैडर बनाने का उद्देश्य स्पेशल ब्रांच में खुफिया जानकारी जुटाने जैसे विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित, योग्य और अनुभवी कर्मियों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

अदालत अपने फैसले में कहा कि जेएसएससी को भर्ती विज्ञापन में पदों की पहचान और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण सेवा शर्तों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। 

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