सहायक आचार्य नियुक्ति में आरक्षण की अनदेखी, पारा शिक्षकों ने झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका
झारखंड हाई कोर्ट में 35 पारा शिक्षकों ने जेएसएससी सहायक आचार्य नियुक्ति विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिका में ओबीसी ...और पढ़ें

हाई कोर्ट में 35 पारा शिक्षकों ने दाखिल की याचिका।
HighLights
35 पारा शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।
ओबीसी के लिए शून्य रिक्तियों पर सवाल उठाए गए।
न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता में छूट की मांग की।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से जारी सहायक आचार्य नियुक्ति (पारा शिक्षकों के लिए) के विज्ञापन के कुछ प्रविधानों को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। राम प्रकाश यादव सहित 35 कार्यरत पारा शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
याचिका में आरक्षण रोस्टर, अनारक्षित पदों पर चयन और न्यूनतम अंकों से संबंधित शर्तों पर सवाल उठाए गए हैं। पारा शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता तान्या सिंह द्वारा दाखिल याचिका के अनुसार, कक्षा एक से पांचवीं तक के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1,909 पदों और स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य (सामाजिक विज्ञान) के 660 नियमित पदों पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 और पिछड़ा वर्ग-2 के लिए शून्य रिक्तियां दर्शाई गई हैं।
याचिकाकर्ताओं ने इन दोनों श्रेणियों के लिए रिक्तियां शून्य रखने का आधार स्पष्ट करने की मांग की है। याचिका में विज्ञापन की उस शर्त पर भी आपत्ति जताई गई है, जिसके तहत आरक्षित श्रेणी के अंकों के आधार पर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) या अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों को केवल आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए पात्र माना गया है।
याचिकाकर्ताओं ने पारा शिक्षकों के लंबे शिक्षण अनुभव का हवाला देते हुए प्रश्नपत्रों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की अनिवार्यता में छूट देने की मांग की है।
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