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गंभीर बीमारी वाले शिक्षकों के अंतर जिला तबादले में बाधा नहीं, 10 सप्ताह में पूरी करें प्रक्रिया: झारखंड हाई कोर्ट

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:27 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिक्षकों के अंतर जिला तबादले पर जिला शिक्षा स्थापना समिति के ...और पढ़ें

अदालत ने दावा खारिज करने के आदेश को किया निरस्त।

अदालत ने दावा खारिज करने के आदेश को किया निरस्त।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने शिक्षकों के अंतर जिला तबादले पर जिला फैसला रद्द किया।

  2. गंभीर बीमारी वाले शिक्षकों को मिलेगा अंतर जिला तबादले का लाभ।

  3. तबादला प्रक्रिया 10 सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे शिक्षकों, उनके पति-पत्नी या बच्चों के इलाज से जुड़ी परिस्थितियों में अंतर जिला तबादले को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के बाद अदालत ने पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा स्थापना समिति के 24 जुलाई 2025 के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसके तहत शिक्षकों के अंतर जिला तबादले के दावा खारिज कर दिया गया था।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को सभी याचिकाकर्ताओं के रिकार्ड प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने तबादला नीति के अनुसार मंजूरी देने और तबादला आदेश जारी करने की प्रक्रिया 10 सप्ताह में पूरी करने को कहा है।

90 शिक्षकों ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

इस संबंध में 90 शिक्षकों ने जिला शिक्षा स्थापना समिति के फैसले को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता पश्चिमी सिंहभूम जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार की तबादला नीति के तहत उनके मामलों की जांच की गई थी और मेडिकल बोर्ड ने बीमारी से जुड़े मामलों को सही पाया था।

इसके बाद भी जिला स्तर पर उनके तबादले के प्रस्ताव खारिज कर दिया। जिला प्रशासन का तर्क था कि तबादले से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। अदालत ने कहा कि जिला प्रशासन का फैसला राज्य सरकार की अपनी नीति के विपरीत है।

जब शिक्षकों के मामलों की जांच कर उन्हें नीति के दायरे में पाया गया, तो जिला प्राधिकार को उनके दावे खारिज करने के बजाय रिकार्ड मंजूरी के लिए प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भेजना चाहिए था।

गैर सरकारी सहायता प्राप्त प्रारंभिक विद्यालयों को मिले 73.41 करोड़

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने गैर सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों (अल्पसंख्यक सहित) के लिए 73.41 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इस राशि से इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मियों का चालू वित्तीय वर्ष में वेतन भुगतान होगा। निदेशालय ने वेतन भुगतान को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किया है।

इसके तहत राशि का उपयोग वैध रूप से नियुक्त और कार्यरत शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन भुगतान पर ही किया जाएगा। साथ ही किसी भी परिस्थिति में अप्रशिक्षित शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं होगा।

जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षकों की नियुक्ति सक्षम प्राधिकार से हुई है और उनका वेतन निर्धारण प्राथमिक शिक्षा निदेशालय से अनुमोदित हो।

विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होगा। स्वीकृत इकाई से अधिक या गैर स्वीकृत विषय के शिक्षकों के वेतन पर भी राशि खर्च नहीं होगी। वेतन भुगतान के लिए विद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करना अनिवार्य किया गया है।