रेंट कंट्रोलर ही करेंगे सुनवाई, कमर्शियल कोर्ट का अधिकार नहीं, व्यावसायिक संपत्ति के रेंट विवाद पर झारखंड HC का फैसला
रांची हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि विशेष किराया नियंत्रण कानून के तहत किरायेदार की बेदखली का अधिकार रेंट ...और पढ़ें

किराया नियंत्रण मामलों में वाणिज्यिक अदालतों का अधिकार क्षेत्र सीमित।
HighLights
किराया नियंत्रण मामलों में वाणिज्यिक अदालतों को अधिकार नहीं।
रेंट कंट्रोलर को बेदखली का अधिकार, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया।
धनबाद के व्यावसायिक परिसर विवाद में याचिका खारिज हुई।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष किराया नियंत्रण कानून के तहत किरायेदार को बेदखल करने का अधिकार रेंट कंट्रोलर को दिया गया है, तो ऐसे मामलों की सुनवाई वाणिज्यिक अदालत (कमर्शियल कोर्ट) नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि लीज पर ली गई संपत्ति का उपयोग पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है, कमर्शियल कोर्ट को उस विवाद पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं हो जाता। इसके साथ ही अदालत ने एक निजी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।
मामला धनबाद स्थित एक व्यावसायिक परिसर से जुड़ा है। वर्ष 2023 में मकान मालिक देवानंद सिंह एंड संस ने धनबाद के रेंट कंट्रोलर-सह-उप मंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष निजी कंपनी के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की थी।
कंपनी ने इस कार्रवाई को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि विवादित संपत्ति का उपयोग पूरी तरह व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और विवादित दावा 43 लाख रुपये से अधिक का है।
इसलिए कमर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत केवल कमर्शियल कोर्ट को ही इस मामले की सुनवाई का अधिकार है। कंपनी ने यह भी दलील दी कि वर्तमान में विवादित परिसर पर उसका नहीं, बल्कि उसकी पूर्व फ्रेंचाइजी का कब्जा है। ऐसे में रेंट कंट्रोलर इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।
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