ट्रेन से गिरे यात्री के परिजनों को मिलेगा 8 लाख का मुआवजा, झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला
झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रेन से गिरकर यात्री की मौत को अनुचित घटना मानते हुए परिजनों को 8 लाख रुपये ...और पढ़ें

रेल दुर्घटना में जान गंवाने वाले के स्वजनों को मिलेगा आठ लाख मुआवजा।
HighLights
झारखंड हाई कोर्ट ने रेल यात्री की मौत पर 8 लाख मुआवजा दिया।
मृतक अशोक महतो के पास वैध टिकट था, माना गया वैध यात्री।
रेलवे दावा अधिकरण का फैसला खारिज, 7% ब्याज भी मिलेगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रेल यात्री की ट्रेन से गिरने से हुई मौत को अनुचित घटना मानते हुए जान गंवाने वालों के स्वजनों को आठ लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण, रांची बेंच के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें परिजनों का दावा नकार दिया गया था।
अशोक महतो एक अगस्त 2017 को जमुई से मधुपुर के लिए दानापुर-टाटानगर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार थे। उन्होंने वैध द्वितीय श्रेणी का टिकट खरीदा था। इस दौरान वह ट्रेन से गिर गए और उनकी मौत हो गई।
अशोक के भाई ने मधुपुर जीआरपीएस में सूचना दी, जिसके आधार पर यूडी केस दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच कर पंचनामा तैयार किया और पुष्टि की कि मौत ट्रेन से गिरने के कारण हुई थी।
निचली अदालत का आदेश
रेलवे दावा अधिकरण, रांची ने 26 अप्रैल 2023 को दिए अपने आदेश में दावा खारिज कर दिया था। अधिकरण ने कहा था कि यह मामला रेलवे अधिनियम की धारा 123(सी)(2) के दायरे में नहीं आता है और मृतक को वैध यात्री नहीं माना जा सकता।
हाई कोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि अधिकरण का आदेश त्रुटिपूर्ण है। अदालत ने कहा कि मृतक के पास से वैद्य ट्रेन टिकट मिला था, जिसे पंचनामा और जांच रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया। इससे यह साबित होता है कि वह एक वैध यात्री था।
अदालत ने पूर्वी रेलवे को निर्देश दिया कि वह पीड़ित के परिजनों (पत्नी और चार बेटियों) को आठ लाख रुपये का मुआवजा दुर्घटना की एक अगस्त 2017 से लेकर वास्तविक भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। यह राशि आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर दी जानी है।