रांची, जागरण संवाददाता। Short Film Damdi Story फिल्म को समाज का आईना कहा जाता है। या यूं कहें कि जो कुछ हम अपने आस-पास देखता हैं, उसकी अनुभूति को कोरे कागज पर उतारते हैं। कागज जब कहानी से सज जाए, तो उसे फिल्म का रूप दे डालते हैं। झारखंड की राजधानी रांची में भी कई फिल्में बन रही हैं। इसी बीच कृष्णा किशोरी और उमंग प्रोडक्शन के बैनर तले बनी शॉर्ट फिल्म 21 नवंबर को पॉकेट फिल्म्स पर रीलीज हो चुकी है। शॉर्ट फिल्म के लेखन और निर्देशन का काम कल्याणी शाहदेव ने किया है। इस फिल्म में रीना सहाय,राजेश कुमार, अवनीश भारद्वाज, बिपिन ठाकुर, ज्योति गुप्ता, सौम्या सिंह राजपूत दमड़ी में मुख्य किरदार की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

एक अनाथ के साथ समाज

दमड़ी के जन्म के साथ ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो जाती है। अनाथ दमड़ी को सहारा देने वाला कोई है, तो बस उसकी दादी और समाज के लोग। दादी चाकरी कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाती। दमड़ी समाज के लोगों के बीच खेलता-कूदता। बचपन बीतने के बाद दमड़ी बड़ा हो जाता है। बड़ा होने के बाद उसे गूंजा नाम की लड़की से इश्क होता है। इश्क में सराबोर होने तक तो सब ठीक रहता है। लेकिन 'संगत से गुण होत है, संगत से गुण जात।' यह इस शॉर्ट फिल्म में चरितार्थ होता नजर आ रहा है। दमड़ी नशे से प्यार कर बैठा है और गरीबी में आटा गिला कर रहा है। नशे के आदत ने धीरे-धीरे उसे अंदर से तोड़ दिया और लोग उसका साथ छोड़कर जाने लगा। स्थिति यहां तक आ गयी कि गूंजा भी एक समय पर उसका साथ छोड़कर चली गयी। तब जाकर जिंदगी में दमड़ी को ठेस लगी। खुद को संभालने की कोशिश की। लेकिन प्रेम रोगी का भला दिल खुद कहां संभलता? फिर धीरे-धीरे समाज के लोगों ने उसके अंदर सकारात्मक विचार डालें, फिर दमड़ी पहले की तरह सामान्य जीवन जीने लगा।

समाज को शिक्षा दे रहा दमड़ी

दमड़ी कुछ लोगों के लिए महज एक मनोरंजन का मात्र जरूर हो सकता है। लेकिन युवावर्ग को संदेश दे रहा है। जो लोग नशे के शिकार हो गये हैं। जिन्हें नशे की लत लग चुकी है। उनके मन में सिर्फ एक बात आती है, कि आखिर ये बुरी आदत कैसे छूटे? दमड़ी उन युवाओं को संदेश दे रहा है कि आप सकारात्मक कार्य में लगे रहेंगे और समाज के लोगों के बीच रहेंगे, तो आपके अंदर कोई नकारात्मक भावना नहीं आएगी। जब समय की कमी होगी, तो कोई भी युवा नशा का आदि नहीं होगा।

Edited By: M Ekhlaque

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