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    Jharkhand के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता को हाई कोर्ट से मिली राहत, दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका खारिज

    Updated: Sat, 04 May 2024 09:32 AM (IST)

    शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस चंद्रशेखर व जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ से राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार को बड़ी राहत दी। खंडपीठ ने दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका को सुनवाई करने के योग्य नहीं माना। कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले में अदालत ने 23 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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    Jharkhand के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता को हाई कोर्ट से मिली राहत (File Photo)

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस चंद्रशेखर व जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ से राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली है।

    खंडपीठ ने दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना और इसे खारिज कर दिया। इस मामले में अदालत ने 23 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    हाई कोर्ट के जज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी का था आरोप

    महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता पर हाई कोर्ट के एक जज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने का आरोप था। इसके बाद एकल पीठ ने स्वत: संज्ञान और एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने के बाद दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था।

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    ये है मामला

    एकल पीठ ने खंडपीठ के पास अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मामला स्थानांतरित कर दिया था। बता दें कि हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की एकलपीठ में साहिबगंज की तत्कालीन थाना प्रभारी रूपा तिर्की की मौत की सीबीआइ जांच कराने के लिए याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सुनवाई जारी थी।

    13 अगस्त 2021 को महाधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि इस केस में आनलाइन सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता का माइक आन रह गया था। इसमें प्रार्थी के वकील मृतक के स्वजन से कह रहे हैं कि इस केस में 200 प्रतिशत जीत होगी और सीबीआइ जांच तय है।

    कोर्ट ने जारी किया था नोटिस

    महाधिवक्ता ने जज से कहा था कि अब आपको इस केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। इस आचरण पर अदालत ने दोनों से माफी मांगने को कहा था, लेकिन दोनों ने माफी नहीं मांगी। इसके बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किया।

    महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता ने नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही इस मामले में किसी सरकारी वकील को ही पेश होने दिया। इसके बाद अदालत ने अवमानना का मामला चलाने के लिए खंडपीठ के पास मामला स्थानांतरित कर दिया था।

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