रांची : कचहरी चौक स्थित केंद्रीय कारागार में जहां बिरसा मुंडा ने नौ जून 1900 को अंतिम सांसे ली थी। उसे म्यूजियम बनाया जा रहा है। म्यूजियम घूमने आने वाले बिरसा मुंडा सहित राज्य के तमाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन दर्शन से रू-ब-रू होंगे। खासकर बिरसा मुंडा के जेल में बिताए पल को डॉक्यूमेंट्री, ऑडियो-वीडियो विजुअल के माध्यम से अवगत कराया जाएगा। कारागार को संरक्षित करने का कार्य लगभग पूरा हो गया है। साल के अंत तक म्यूजियम को आमलोगों के लिए खोल दिया जाएगा। दो माह के अंदर हो गई थी बिरसा मुंडा की मृत्यु

इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी के राज्य प्रमुख एसडी सिंह के अनुसार बिरसा मुंडा को मार्च 1900 में केंद्रीय कारागार लाया गया था। दो माह बाद ही नौ जून को देर रात उनकी जेल में मौत हो गई। जन भावना भड़कने के डर से आनन-फानन में अंग्रेजों ने उनके शव को कोकर में डिस्टिलरी पुल के पास दफना दिया गया था। यहां अब बिरसा मुंडा स्मारक बनाया गया है। कमिश्नरी ऑफिस को बनाया गया था कारागार

आजादी से पूर्व केंद्रीय कारागार पहले कमिश्नरी ऑफिस हुआ करता था। बाद में इसे कारागार में तब्दील कर दिया गया। अंग्रेजी शासन काल में कारागार को 500 कैदियों के लिए बनाया गया था। पुरुष के लिए 10 बड़े-बड़े हॉल एवं महिलाओं के चार हॉल बनाए गए थे। आज की ही तरह उस समय भी दुर्दांत कैदियों को अलग कोपभवन में रखा जाता था। इसके लिए पांच कोपभवन बनाए गए थे। नाम के अनुरूप ही छोटे से रूम में दिन में भी अंधेरा रहता था। कोपभवन के पास में ही सिपाहियों के लिए विश्रामालय बनाया गया था।

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