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पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के खास का खेल खत्म, ACB की रिपोर्ट ने खोली भ्रष्टाचार की फाइल; NGO प्रभारी इंस्पेक्टर गणेश सिंह सस्पेंड

Published: Wed, 10 Dec 2025 11:33 AM (IST)Updated: Wed, 10 Dec 2025 02:56 PM (IST)

रांची में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के एनजीओ प्रभारी रहे इंस्पेक्टर गणेश सिंह को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की एडीजी ...और पढ़ें

पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर शिकंजा कसना शुरू। (फाइल फोटो)

पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर शिकंजा कसना शुरू। (फाइल फोटो)

राज्य ब्यूरो, रांची। पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के एनजीओ प्रभारी रहे इंस्पेक्टर गणेश सिंह को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की एडीजी प्रिया दुबे ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इंस्पेक्टर गणेश सिंह की पोस्टिंग पहले ACB में ही थी, लेकिन उनका स्थानांतरण ACB हजारीबाग में किया गया था।

सूत्रों के अनुसार गणेश सिंह ने तबादले के बावजूद हजारीबाग में योगदान नहीं दिया, जिसके बाद एडीजी प्रिया दुबे ने यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की। सिंह पूर्व डीजीपी के करीबी थे। गोपनीय शाखा में कार्यरत थे। 

IR में भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि

इंस्पेक्टर गणेश सिंह के विरुद्ध ACB धनबाद की टीम ने इनिशियल रिपोर्ट (IR) दाखिल की थी। यह रिपोर्ट उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़ी हुई थी। जांच में पाया गया कि IR में लगाए गए इंस्पेक्टर गणेश सिंह पर लगे आरोपों की पुष्टि हो गई है, जिससे ब्यूरो में हड़कंप मच गया है।

अब PE दर्ज करने की तैयारी

आरोपों की पुष्टि होने के बाद, ACB अब इंस्पेक्टर गणेश सिंह के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। नियम के अनुसार, PE दर्ज करने के लिए ACB को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभागसे अनुमति लेनी होगी।

सरकारी अनुमति प्राप्त होते ही ACB औपचारिक रूप से PE दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू करेगी। यह कार्रवाई ACB की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दर्शाती है और भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

भाजपा के निशाने पर थे पूर्व डीजीपी, मरांडी ने लगाया था आरोप

इंस्पेक्टर गणेश सिंह का यह निलंबन ऐसे समय में हुआ है, जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को घेरते रहे हैं।

मरांडी ने न केवल पूर्व डीजीपी की नियुक्ति और सेवा विस्तार की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, बल्कि यह भी आरोप लगाया था कि पूर्व आईपीएस अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों (जैसे अवैध वसूली, उत्खनन और गैंगस्टर से साठगांठ) को सरकार द्वारा संरक्षण दिया जा रहा था। बाबूलाल मरांडी ने सार्वजनिक तौर पर यह आरोप भी लगाया था कि अनुराग गुप्ता पर पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क संचालित करने का संदेह है।

भ्रष्टाचार के मामलों में ACB की जांच प्रक्रिया: IR से निलंबन तक

इंस्पेक्टर गणेश सिंह का मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की मानक जांच प्रक्रिया को दर्शाता है। किसी भी भ्रष्टाचार के आरोप की शुरुआत इनिशियल रिपोर्ट (IR) से होती है, जैसा कि इस मामले में ACB धनबाद की टीम ने दाखिल की थी।

  • IR की पुष्टि: IR वह प्रारंभिक रिपोर्ट होती है जो आरोपों की सत्यता को स्थापित करती है। जब IR में लगे आरोपों की पुष्टि हो जाती है (जैसा कि गणेश सिंह के मामले में हुआ), तो ACB जांच के अगले चरण में जाती है, जिसे प्रारंभिक जांच (PE) कहा जाता है।
  • प्रारंभिक जांच (PE) की अनिवार्यता: PE दर्ज करने के लिए, ACB को संबंधित विभाग, यानी मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति लेनी होती है। यह प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने के लिए आवश्यक है। PE में, ब्यूरो आरोपों की गहनता से जांच करती है और साक्ष्य जुटाती है। यदि PE में साक्ष्य मिलते हैं, तो अंतिम चरण में एफआईआर (FIR) दर्ज होती है।
  • निलंबन और प्रशासनिक कार्रवाई: भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में, आरोप की पुष्टि होते ही संबंधित अधिकारी को प्रशासनिक आधार पर निलंबित किया जाता है। निलंबन का अर्थ है कि अधिकारी को सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाता है, लेकिन जांच पूरी होने तक उसे जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) मिलता रहता है। निलंबन एक प्रशासनिक कार्रवाई है, जबकि PE और FIR दर्ज होना एक कानूनी प्रक्रिया है।