रांची, [जागरण स्‍पेशल]। भारतीय रेल आपकी सफल, सुखद और मंगलमय यात्रा की कामना करता है... रेल यात्रियों का अक्सर इस उद्घोषणा से वास्ता पड़ता है। लेकिन, यात्रा के दौरान कई बार ऐसा नहीं होता। आजकल तो इंडियन रेलवे की प्रीमियम ट्रेनें भी बेहतर सुविधा के नाम पर यात्रियों को गच्‍चा दे रहीं हैं। रांची से नई दिल्‍ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस की बात करें तो यहां लापरवाही का आलम यह है कि शिकायत पुस्तिका में कम्‍प्‍लेन दर्ज होने के बाद भी रेल प्रशासन कार्रवाई के नाम पर बस खानापूरी ही करता है। बीते दिन ई दिल्‍ली-भुवनेश्‍वर राजधानी एक्‍सप्रेस में फूड प्‍वायजनिंग के कारण करीब 60 लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद भले ही कैटरिंग कांट्रैक्‍टर्स पर कुछ कड़ाई हुई हो, लेकिन खाने की गुणवत्ता अब भी बेहतर नहीं कही जा सकती। बेधड़क यात्रियों को रोज निम्‍न स्‍तर का खाना ही परोसा जा रहा है।

बिना लाइसेंस के आठ माह से रेल यात्रियों को खाना परोस रहा कैटरर
रांची से दिल्ली जानेवाली राजधानी ट्रेनों के यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ की बानगी यह है कि ट्रेन में कैटरिंग सर्विस उपलब्ध कराने वाले दीपक कंपनी के पास कोई फूड लाइसेंस नहीं हैं। बावजूद वह आठ महीने से राजधानी एक्‍सप्रेस के यात्रियों को खाने की सप्‍लाई कर रहा है। खुद की जोखिम पर खाना खाने की इस लाचारी को न ही रेलवे ने कभी चेक किया और न ही जिला प्रशासन ने इसकी सुध ली।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि ट्रेन के यात्रियों के साथ फूड प्‍वायजनिंग या खान-पान से जुड़ी किसी भी तरह की दूसरी समस्या होने पर आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। आइआरसीटीसी की इस लापरवाही के कारण कहीं भी-कभी भी यात्रियों को अपनी जान का जोखिम उठाना पड़ सकता है। बेस किचन मैनेजर श्रवण कुमार रजक की मानें तो फूड लाइसेंस के लिए आठ माह पहले अप्लाई किया गया, लेकिन अभी तक नहीं मिला है।

बेस किचन की हालत खराब, गुणवत्ता से कोई मतलब नहीं
रांची के चुटिया इलाके में कैटरर के बेस किचन की बात करें तो यहां साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखा जाता है। जहां बर्तनों की धुलाई होती है, वहीं, उसके बगल वाले कमरे में खाना बनाया जाता है। तमाम मानक इनकी लापरवाही के आगे बौने साबित होते हैं। बताया गया कि यात्रियों को परोसे जानेवाले खाने की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती है। रेलवे द्वारा न कोई आपत्ति और न ही कोई कार्रवाई की जाती है। फूड प्लाजा के किचन में साफ-सफाई की व्यवस्था भी न के बराबर दिखती है। जिस टेबल पर कटलेट तैयार किया जा रहा था, उसी टेबल पर किचेन में काम करने वाले कर्मी खाना खा रहे थे। इस व्यवस्था के बीच ग्राहकों को खाना परोसा जाता है।

 

सीनियर डीसीएम ने स्टेशन मैनेजर की लगाई क्लास
रांची रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल और ट्रेन की पैंट्रीकार व रेलवे कैंटीन में साफ-सफाई की लगातार मिल रही शिकायत के बीच मंडल के सीनियर डीसीएम अवनीश कुमार ने फूड स्टॉलों और रेलवे कैंटीन का औचक निरीक्षण किया। जांच टीम सबसे पहले बिरसा मुंडा फूड प्लाजा पहुंची। किचन में प्रवेश करते ही चारों ओर गंदगी दिखी। कहीं पानी फैला हुआ था तो कहीं बासी खाना सड़ कर गंध दे रहा था। यह देख सीनियर डीसीएम ने स्टेशन मैनेजर ध्रुव कुमार की जमकर क्लास लगाई। एडीआरएम नीरज कुमार ने स्टेशन मास्टर से कहा कि ध्रुव जी जरा स्टेशन पर भी टहला कीजिए। गंदगी कहीं भी दिखी तो सख्त कार्रवाई होगी। बिरसा मुंडा फूड प्लाजा के मैनेजर को भी सख्त लहजे में चेतावनी देकर अधिकारियों को रिपोर्ट बना कर भेजने को कहा गया।

रेल यात्रियों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
शाकाहारी और मांसाहारी कैंटीन में मैनेजर शिकायत पुस्तिका तक अपडेट नहीं रखते। कैंटीन के पर्दे बेहद गंदे, पर्याप्त लाइट आदि की साफ कमी दिखती है। रेल यात्रियों के स्वास्थ्य से समझौता कर यहां खाने की सप्‍लाई की जा रही है। मालूम हो कि भुवनेश्वर-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आने के बाद से ही दैनिक जागरण लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है। एडीआरएम ऑपरेशन एमएम पंडित सीनियर डीसीएम अवनीश कुमार और सीनियर सीपीआरओ नीरज कुमार ने कहा कि कंट्रोल पेस्‍ट, आइआरसीटीसी सहित कैटरिंग एजेंसियाें को इस बारे में कड़ी हिदायत दी गई है। जल्‍द ही व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त हो जाएगी।

ट्रेन में शराब पीने की शिकायत
रांची रेल डिवीजन की रांची-दिल्ली राजधानी एक्‍सप्रेस में पैंट्रीकार और बेस किचन की सूरत-ए-हाल की पड़ताल में व्‍यापक खामियां उजागर हुई हैं। इसके अलावा कुछ दिन पहले ही रांची स्‍टेशन पर खड़ी राजधानी एक्‍सप्रेस में शराब पीने का मामला भी उजागर हुआ था। तब रेलवे ने पैसेंजर पर जुर्माना लगाकर अपने कर्तव्‍य की इतिश्री कर ली। हालांकि, तब पैसेंजरों ने एक सुर से राजधानी की सुरक्षा व्‍यवस्‍था को लेकर सवाल खड़े किए थे।

प्रयागराज में स्टॉपेज की अनुमति लेकिन टिकट कानपुर का
तमाम सर्विस चार्ज वसूलने के बाद भी झटके देने के मामले में राजधानी एक्‍सप्रेस का कोई मुकाबला नहीं है। निम्‍न स्‍तर की साफ-सफाई, कॉकरोच, चूहे, घटिया खाना, कटे-फटे कंबल-तौलिया-बेडरोल और मच्‍छर इनकी पहचान बनती जा रही हैं। इनमें आपकी यात्रा मंगलमय के बजाय कष्‍टमय और भगवान भरोसे ही कही जा सकती है। आश्चर्य की बात यह है कि रांची-नई दिल्‍ली राजधानी एक्‍सप्रेस का प्रयागराज में स्टॉपेज के बावजूद टिकट नहीं कट रहा है। फरवरी माह में ही प्रयागराज में रोकने की अनुमति प्रदान की गई थी। लेकिन, जब यात्रियों ने रांची से प्रयागराज तक का टिकट रिक्वेस्ट डाला, तो इसकी अनुमति नहीं मिली। यह अनुमति या तो दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन या फिर कानपुर तक मिल रही थी। ऐसे में प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को 706 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 900 किलोमीटर की दूरी तक का किराया देना पड़ रहा है।

बेपटरी हो सकती थी राजधानी, अगर होती रफ्तार में
बीते दिन रांची-नई दिल्‍ली राजधानी एक्‍सप्रेस को यार्ड से स्‍टेशन पर लाने के दौरान बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया, जब बीच रास्‍ते में इसकी कपलिंग टूट गई। इसके कारण यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से खुली। रेलवे की सुरक्षा व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाने वाली इस घटना को भले ही संयोग माना जाए, लेकिन अगर राजधानी की यह स्थिति है, तो दूसरे रेलगाडियों से क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है।

बिना लाइसेंस के कोई भी यात्रियों को खाना नहीं परोस सकता है। अगर ऐसा है तो मामला गंभीर है। हम जल्‍द ही इसे व्‍यवस्थित करेंगे। -देवाशीष चंद्रा, जीजीएम, आइआरसीटीसी

Posted By: Alok Shahi

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