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    झारखंड के इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का अविरल अभिषेक करती हैं पाताल गंगा, 1500 साल पुराना है इतिहास

    By Vikram GiriEdited By:
    Updated: Tue, 10 Aug 2021 01:59 PM (IST)

    Jharkhand News भगवान शिव की शक्ति व मां गंगा की भक्ति का अद्भूत स्थल रामगढ़ जिला के टूटी झरना मे है।यह जिला मुख्यालय से करीब 10 किलो मीटर व एनएच-33 से करीब डेढ़ किलो मीटर के दूरी में स्थित है।

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    झारखंड के इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का अविरल अभिषेक करती हैं पाताल गंगा। जागरण

    राजेश्वर/राकेश कुजू (रामगढ़) । भगवान शिव की शक्ति व मां गंगा की भक्ति का अद्भूत स्थल रामगढ़ जिला के टूटी झरना मे है।यह जिला मुख्यालय से करीब 10 किलो मीटर व एनएच-33 से करीब डेढ़ किलो मीटर के दूरी में स्थित है। टूटी झरना मंदिर में भगवान शिव पर मां गंगा द्वारा अविरल जलाभिषेक करते आ रही है। मां गंगा द्वारा बाबा भोलेनाथ को किए जा रहे जलाभिषेक के जल के श्रोत का पता वैज्ञानिक भी नहीं लगा सके हैं।

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    आदिकाल से मां गंगा की नाभि से स्वत: निकलती पवित्र जल की धारा उनके दोनों हाथों के द्वारा शिवलिंग के बीचों बीच गिरती आ रही है। जब से मंदिर का अस्तित्व लोगो के बीच आया है। तब से श्रद्धालुओं को यह पर शिव की शक्ति व मां गंगा के भक्ति का अद्भूत दर्शन हो रहे हैं। सावन मास में यह शिवालय रामगढ़ जिला के लिए बाबा बैजनाथ धाम की तरह है। पूजा-अर्चना के लिए यहां शिव भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

    बताया जाता है कि मंदिर 15 सौ साल पुराना है। अंग्रेजों के शासनकाल में रेलवे लाइन लगाने के क्रम में मजदूरों द्वारा पानी खोजने के क्रम में खुदाई करने के दौरान मंदिर का उपरी हिस्सा नजर आया था। तब मजदूरों ने वहां पानी के लिए खुदाई करना छोड़ दिया और इसकी सूचना ठेकेदार को दिया गया। ठेकेदार ने सावधानी पूर्वक मिट्टी को हटा कर मंदिर को जमीन के गर्भ से बाहर निकाला गया। सफाई के बाद मंदिर के सामने तीन छोटे मुख्य द्वार व अंदर जाने के लिए एक द्वार मिला। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग व उसके ठीक ऊपर मां गंगा की प्रतिमा के नाभि से पवित्र जल की धारा दोनों हाथो से होते हुए शिवलिंग पर गिरता दिखाई दिया।

    जो आज भी वह दृश्य शिवभक्तों को देखने को मिल रही है। मंदिर की सूचना के बाद आसपास के ग्रामीण विधिवत नियमित पूजा-अर्चना करने लगे। बताया जाता है कि यहां पर दो साधुओं ने भगवान भोलेनाथ का आराधना शुरू किया। जिनकी मृत्यु के बाद मंदिर परिसर में समाधि बनाई गई है। इनके बाद 80 के दशक में रघुनाथ बाबा मंदिर के मुख्य पुजारी बने। मंदिर का विकास जिस गति से होना चाहिए उस गति से विकास नहीं हो पाई है। अगर इसका सही तरीके से विकास कर पर्यटक स्थल में परिवर्तित किया जाय तो राज्य के लिए एक धरोहर तैयार हो जाएगा।