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    Jharkhand News: झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर, अब वेतन में होगी कटौती; जानिए वजह

    झारखंड के सभी राज्यकर्मी के लिए जरूरी खबर सामने आई है जिसमें स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर नया अपडेट सामने आया है। आदेश के अनुसार राज्य कर्मियों को प्रति माह मिल रहे एक हजार रुपये के चिकित्सा भत्ता में से 500 रुपये प्रतिमाह की कटौती की जाएगी ताकि छह हजार रुपये का वार्षिक प्रीमियम जमा हो सके। अब कर्मियों को प्रतिमाह 500 रुपये ही चिकित्सा भत्ता के रूप में मिलेग।

    By Ashish Jha Edited By: Sanjeev Kumar Updated: Tue, 25 Feb 2025 11:21 AM (IST)
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    झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ( ANI फोटो)

    राज्य ब्यूरो, रांची। Jharkhand News: झारखंड के वित्त विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिवों के साथ-साथ सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होने के संदर्भ में जानकारी देते हुए चिकित्सा भत्ता कटौती से संबंधित आदेश जारी कर दिया है।

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    आदेश के अनुसार राज्य कर्मियों को प्रति माह मिल रहे 1000 रुपये के चिकित्सा भत्ता में से 500 रुपये प्रतिमाह की कटौती कर ली जाएगी ताकि छह हजार रुपये का वार्षिक प्रीमियम जमा हो सके।

    अब कर्मियों को प्रतिमाह 500 रुपये ही चिकित्सा भत्ता के रूप में मिलेगा। वित्त सचिव प्रशांत कुमार के आदेश से सभी विभागाध्यक्षों को इसकी सूचना दे दी गई है।

    सचिवालय कर्मियों की वरीयता सूची के प्रकाशन पर रोक

    झारखंड सरकार में सचिवालय कर्मियों की वरीयता का निर्धारण करने के लिए जारी आदेश (आदेश संख्या 128) को रोक दिया गया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव रवि आनंद ने इस संदर्भ में पत्र जारी कर कहा है कि विभागीय आदेश के कार्यान्वयन, नष्पादन और संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगाई जाती है।

    ज्ञात हो कि बिहार से स्वेच्छा से झारखंड आनेवाले कर्मियों को वरीयता क्रम में नीचे रखे जाने का प्रविधान है। इस आलोक में कर्मियों की वरीयता प्रभावित होती है। इसी विवाद में हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया है जिसके उपरांत यह कार्रवाई की गई है।

    राजस्व अधिकारी पर झारखंड हाईकोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

    वहीं, एक अन्य मामले में लंबे समय से चले गैर मजरूआ खास जमीन की जमाबंदी रद करने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने अपने एक हालिया आदेश में जिला एवं सूबे के राजस्व अधिकारियों के बारे में कड़ी टिप्पणी की है।

    उच्च न्यायालय ने कहा है कि पूर्व की कई न्यायिक घोषणाओं के बावजूद राज्य के अधिकारी नीति नियमों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। वे केवल अपने को दस्तावेजों तक सीमित कर दिए हैं। इसलिए राजस्व अधिकारियों के लिए नियमों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण का सत्र आयोजित करने की जरूरत है।

    सभी जिला के उपायुक्तों को निर्देश

    न्यायालय ने मामले में प्रतिवादी बने राज्य के मुख्य सचिव एवं राजस्व सचिव को इसके लिए निर्देश देते हुए सभी जिला के उपायुक्तों को न्यायालय के आदेश की प्रति सर्कुलेट करने को कहा है। मामला कोडरमा जिला के तिलैया थाना क्षेत्र के मड़वाटांड़ मौजा के खाता नंबर 1/50, प्लाट 97/638, 97/639, 97/640 से संबंधित है।

    जमीन के बंदोबस्तीधारक धनी गोप द्वारा दायर डब्ल्यूपीसी 4258/2023 में पारित आदेश में न्यायालय ने कोडरमा के तत्कालीन डीसी द्वारा इनकी जमाबंदी रद करने संबंधी पारित आदेश को खारिज करते हुए उन्हें राहत प्रदान की है।