Ranchi News: रांची हाईकोर्ट ने जेलों में रिक्त पदों और महिला कैदियों के लिए अलग जेल पर मांगी रिपोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में जेल मैनुअल को लागू करने के मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार से जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति की जानकारी मांगी है। अदालत ने महिला कैदियों के लिए अलग जेल बनाने के मुद्दे पर भी विचार किया और सरकार को आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य में जेल मैनुअल को लागू करने को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने जेल में रिक्त पदों को लेकर राज्य से जवाब मांगा है।
अदालत ने सरकार से पूछा कि जेल में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए गृह एवं कारा विभाग की ओर अब तक क्या-क्या कदम उठाया गया है। नियुक्ति के लिए जेपीएससी और जेएसएससी को अधियाचना भेजी गई है या नहीं। इसकी अद्यतन जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अधिवक्ता मनोज टंडन की ओर से महिला कैदियों के लिए अलग से जेल बनाए जाने का मुद्दा उठाया गया। उनकी ओर से कहा गया कि पूरे देश में 31 जेल सिर्फ महिला कैदियों के लिए ही हैं, लेकिन झारखंड में एक भी ऐसी जेल नहीं है, जो सिर्फ महिला कैदियों के लिए हो।
इसपर अदालत ने उन्हें राज्य की जेलों में महिला कैदियों से संबंधित डाटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। राज्य की जेल में 43 मेडिकल ऑफिसर का सृजित पद है, लेकिन 42 पद रिक्त हैं।
इस दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया कि आदेश के तहत सरकार की ओर से जेल मैनुअल से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट जेल में बंद कैदियों के हालात को लेकर सुनवाई कर रहा था।
उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट में इस मामले को भेजते हुए इसकी निगरानी और सुनवाई करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद हाई कोर्ट भी मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।
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